ईद ए मिलादुन्नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क़ुरआन शरीफ से साबित

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Eid e Miladunnabi Sallallahualaihiwasallam Quran shareef se saabit
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Eid e Miladunnabi Sallallahualaihiwasallam Quran shareef se saabit

ईद ए मिलादुन्नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) क़ुरआन शरीफ से साबित

इसमे इन्शा अल्लाह तआला हम यह साबित करेंगे की क़ुरआन ने खुद मिलाद मनाया कुछ बेसिक तर्जुमे जो सबको पता होती है: मिलाद के मा…

इसमे इन्शा अल्लाह तआला हम यह साबित करेंगे की क़ुरआन ने खुद मिलाद मनाया

कुछ बेसिक तर्जुमे जो सबको पता होती है:

मिलाद के माना है: पैदाइश

ईद: ख़ुशी

मिलादुन्नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम: नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पैदाइश

मिलाद मानना : पैदाइश का ज़िक्र करना

ईद ए मिलाददुन्नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) मानना:

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की पैदाइश की ख़ुशी का ज़िक्र करना.

अब दलील देखते है की क़ुरआन ने मिलाद मनाया या नहीं?

दलील 1

सौराह मरयम, आयत 7

يَا زَكَرِيَّا إِنَّا نُبَشِّرُكَ بِغُلَامٍ اسْمُهُ يَحْيَى لَمْ نَجْعَلْ لَهُ مِنْ قَبْلُ سَمِيًّا 19:7)

اے زکریا ہم تجھے خوشی سناتے ہیں ایک لڑکے کی جن کا نام یحیٰی ہے اس کے پہلے ہم نے اس نام کا کوئی نہ کیا

तर्जुमा: “अ ज़करिया हम तुमको एक लड़के की बशारत देते है जिसका नाम याह्या है, इससे पहले हमने इस नाम का कोई शख्स पैदा नहीं किया”

हज़रात याह्या अलैहिस्सलाम के बारे है.

दलील 2

सौराह मरयम , आयत 15

وَسَلَامٌ عَلَيْهِ يَوْمَ وُلِدَ وَيَوْمَ يَمُوتُ وَيَوْمَ يُبْعَثُ حَيًّا (19:15)

اور سلامتی ہے اس پر جس دن پیدا ہوا اور جس دن مرے گا اورجس دن زندہ اٹھایا جائے گا (ف۲۲)

तर्जुमा : “और सलामती है उस पैर जिस दिन पैदा हुआ और जिस दिन मरेगा और जिस दिन ज़िंदा उठाया जायेगा”

हज़रात याह्या अलैहिस्सलाम के बारे है.

दलील 3

सौराह मरयम, आयत 17 तो 30

इस आयत में हज़रात इसा अलैहि सालंकी पैदाइश का ज़िक्र है.

दलील 4

(सौराह मरयम , आयत 33)

وَالسَّلَامُ عَلَيَّ يَوْمَ وُلِدْتُ وَيَوْمَ أَمُوتُ وَيَوْمَ أُبْعَثُ حَيًّا (19:33)

اور وہی سلامتی مجھ پر (ف۵۱)جس دن میں پیدا ہوا اور جس دن مروں گااور جس دن زندہ اٹھایا جاؤں گا (ف۵۲)

तर्जुमा: “ और वही सलामती मुझ पैर,जिस दिन में पैदा हुआ और जिस दिन में मरुँगा और जिस दिन ज़िन्दा उठाया जाउगा”

यानी हज़रात इसा अलैहिस्सलाम के बारे है.

दलील 5

सौराह मरयम , आयत 41

وَاذْكُرْ فِي الْكِتَابِ إِبْرَاهِيمَ ۚ إِنَّهُ كَانَ صِدِّيقًا نَبِيًّا (19:41)

اور کتاب میں (ف۶۵) ابراہیم کو یاد کرو بیشک وہ صدیق (ف۶۶) تھاغیب کی خبریں بتاتا

तर्जुमा : “ और किताब में, इब्राहिम को याद करो बेशक वह सिद्दीके, था ग़ैब की खबरे बताता”

दलील 6

सौराह मरयम, आयत 51

وَاذْكُرْ فِي الْكِتَابِ مُوسَى ۚ إِنَّهُ كَانَ مُخْلَصًا وَكَانَ رَسُولًا نَبِيًّا (19:51)

اور کتاب میں موسٰی کو یاد کرو بیشک وہ چُنا ہوا تھا اور رسول تھا غیب کی خبریں بتانے والا

तर्जुमा : “और किताब में मूसा को याद करो बेशक वह चुना हुआ था और रसूल था ग़ैब की खबरे बताने वाला”

डाइल 7

सौराह मरयम, आयत 54

وَاذْكُرْ فِي الْكِتَابِ إِسْمَاعِيلَ ۚ إِنَّهُ كَانَ صَادِقَ الْوَعْدِ وَكَانَ رَسُولًا نَبِيًّا 19:54)

اور کتاب میں اسماعیل کو یاد کرو (ف۸۹) بیشک وہ وعدے کا سچا تھا(ف۹۰) اور رسول تھا غیب کی خبریں بتاتا

तर्जुमा : “और किताब में इस्माइल को याद करो, बेशक वह वादे का सच्चा था, और रसूल ग़ैब की खबरे बताता”

दलील 8

सौराह मरयम, आयत 56

وَاذْكُرْ فِي الْكِتَابِ إِدْرِيسَ ۚ إِنَّهُ كَانَ صِدِّيقًا نَبِيًّا (19:56)

اور کتاب میں ادریس کو یاد کرو (ف۹۳) بیشک وہ صدیق تھا غیب کی خبریں دیتا

तर्जुमा: “और किताब में इदरीस को याद करो, बेशक वह सिद्दीके था ग़ैब की खबरे देता”

दलील 9

सौराह अल इमरान, आयत 81

وَإِذْ أَخَذَ اللَّهُ مِيثَاقَ النَّبِيِّينَ لَمَا آتَيْتُكُمْ مِنْ كِتَابٍ وَحِكْمَةٍ ثُمَّ جَاءَكُمْ رَسُولٌ مُصَدِّقٌ لِمَا مَعَكُمْ لَتُؤْمِنُنَّ بِهِ وَلَتَنْصُرُنَّهُ ۚ قَالَ أَأَقْرَرْتُمْ وَأَخَذْتُمْ عَلَى ذَلِكُمْ إِصْرِي ۖ قَالُوا أَقْرَرْنَا ۚ قَالَ فَاشْهَدُوا وَأَنَا مَعَكُمْ مِنَ الشَّاهِدِينَ (3:81)

اور یاد کرو جب اللّٰہ نے پیغمبروں سے ان کا عہد لیا (ف۱۵۵) جو میں تم کو کتاب اور حکمت دوں پھر تشریف لائے تمہارے
پاس وہ رسول (ف۱۵۶) کہ تمہاری کتابوں کی تصدیق فرمائے (ف۱۵۷) تو تم ضرور ضرور اس پر ایمان لانا اور ضرور ضرور اس کی مدد کرنا فرمایا کیوں تم نے اقرار کیا اور اس پر میرا بھاری ذمہ لیا سب نے عرض کی ہم نے اقرار کیا فرمایاتو ایک دوسرے پر گواہ ہوجاؤ اور میں آپ تمہارے ساتھ گواہوں میں ہوں

तर्जुमा: “और याद करो जब अल्लाह ने पैगम्बरो से उनका अहद लिया,

जो में तुमको किताब और हिकमत दू फिर तशरीफ़ लाये तुम्हारे पास वह रसूल, के तुम्हारी किताबो की तस्दीक फरमाए,

तो तुम ज़रूर ज़रूर उस पर ईमान लाना और ज़रूर ज़रूर उसकी मदद करना फ़रमाया क्यों तुमने इक़रार किया और इस पर मेरा भारी नामा लिया सबने अर्ज़ की हमने इक़रार किया फ़रमाया

तो एक दूसरे पर गवाह हो जाओ और में आप तुम्हारे साथ गवाह में हूँ”

यहाँ पर अल्लाह तआला आलम ए अरवाह में पैगम्बरो से अहद ले रहा है,

नबी “(सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के दुनिया में आने पर.

दलील 10

सौराह मैदा, आयत 114

قَالَ عِيسَى ابْنُ مَرْيَمَ اللَّهُمَّ رَبَّنَا أَنْزِلْ عَلَيْنَا مَائِدَةً مِنَ السَّمَاءِ تَكُونُ لَنَا عِيدًا لِأَوَّلِنَا وَآخِرِنَا وَآيَةً مِنْكَ ۖ وَارْزُقْنَا وَأَنْتَ خَيْرُ الرَّازِقِينَ (5:114)

عیسٰی ا بن مریم نے عرض کی اے اللّٰہ اے رب ہمارے ہم پر آسمان سے ایک خوان اتار کہ وہ ہمارے لئے عید ہو (ف۲۸۲) ہمارے اگلے پچھلوں کی (ف۲۸۳)اور تیری طرف سے نشانی (ف۲۸۴) اور ہمیں رزق دے اور تو سب سے بہتر روزی دینے والا ہے

तर्जुमा: “इसा इब्न मरयम ने अर्ज़ की ए अल्लाह ए रब हम पर आसमान से एक ख्वान उतार के वह हमारे लिए ईद हो,

हमारे अगले पिछले की, और तेरी तरफ से निशानी,और हमे रिज़्क़ दे और तू सबसे बेहतर रोज़ी देने वाला है”

इससे मालुम हुआ के जिस रोज़ अल्लाह तआला की ख़ास रेहमत नाज़िल हो उस दिन को ईद बा अन्ना और खुशिया मानना,

शुक्र ए इलाही बजा लाना तरीका ए सालेहीन है और कुछ शक नहीं के सईद ए आलम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की तशरीफ़ अवारी अल्लाह तआला की अज़ीम तरीन नेमत और बुज़ुर्ग तरीन रेहमत है,

इसलिए हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की विलादत मुबारक के दिन ईद मानना और मिलाद शरीफ पढ़ कर शुक्र ए इलाही बजा लाना मेहमूद और अल्लाह के मक़बूल बन्दों का तरीका है.

Conclusion:

हमने पढ़ा की क़ुरआन ने किन अम्बिया ए क्रम का मिलाद का ज़िक्र किया और यह भी पढ़ा की मिलाद का दिन को ईद क्यों कहा जाये,

अब अगर कोई कहे की नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) अल्लाह तआला की अज़ीम नेमत नहीं (माज़ अल्लाह) वह अपना ठिकाना जहन्नम में तलाश करे

क्युके अल्लाह तआला ने अपने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को रेहमतअलीलालमीन बना कर भेजा है सुब्हान अल्लाह.

ईद ए मिलादुन्नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर फतवा लगाने वालो के लम्हा ए फ़िक्र है यह वरना लगाओ हुकुम क़ुरआन शरीफ पर जो खुद मिलाद का ज़िक्र कर रहा है

और क़यामत तक करता रहेगा, न कोई इसे बदल सकता है न कोई इसे बदल पायेगा, इसका ज़िम्मा खुद रब्बुल आलमीन ने लिया

व मा अलेना इल्लल बलाग

वाल्ला हु आलम सुम्मा रसूलो आलम

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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