रमजान की जुदाई का ग़म

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Junbi Ke Liye Roze Ka Waqt
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Ramzan ki Judaai ka Gham

रमजान की जुदाई का ग़म

आज हम ये सोचकर खुश हो रहे हैं

की रमजान जा रहे है कल ईद है

मगर क्या सहाबा ए किराम भी इसी तरह रमजान के जाने की ख़ुशी किया करते थे

हरगिज़ नहीं सहाबा ए किराम रज़िया-अल्लाहु तआला अन्हु 6 महीना पहले से रमजान के आने का इंतज़ार करते थे

और 6 महीना बाद तक उसके जाने के ग़म में गुज़रते थे

आपको मालूम है ये रेहमतो भरा वो महीना हमसे जुड़ा हो रहा है

जिसमे अल्लाह सबसे ज़्यादा रेहमतें और बरकते नाज़िल फरमाता है

ये वो महीना है जिसमे क़ुरआन नाज़िल हुआ यही वो महीना है

जिसमे एक नेकी का सवाब 70 गुनाह कर दिए जाता है

जो रमजान के आयने पर ख़ुशी का इज़हार करे और जाने पर ग़म का इज़हार करे अल्लाह तआला उसको जन्नत आता फरमाएगा

ये माहे मुबारक अब से पहले किसी उम्मत को न मिला ये सिर्फ नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की उम्मत यानी हमें मिला है

और इसी मुबारक महीने में वो रात आती है जिसमे इबादत कर के हमें हज़ार महीनो से बेहतर सवाब दिए जाता है

इस माह ए मुबारक की हर घडी में बेशुमार बरकत और रेहमतें हैं

रमजान के बाद फिर वही गुनाहों का दौर शुरू हो जाएगा जो रमजान आने से पहले था

शैतान आज़ाद हो जाएगा और मुसलमान फिर उसके फरेब में आ जाएगा

हज़रात अब्दुल क़ादिर जिलानी रहमतुल्लाहि अलैहि ईद के दिन फार्मा रहे थे

“लोग कह रहे हैं आज ईद है

लोग कह रहे हैं आज ईद है

अब्दुल क़ादिर जिलानी की ईद तो जब होगी जब ईमान के साथ दुनिया से में चला जॉन” वो तो कतई जन्नती है

लोगों के लिए दर से है की इंसान को हमेशा अपने ईमान की फ़िक्र करनी चाहिए

और अच्छे अमल करते रहना चाहिए क्या पता हमारा कोनसा गुनाह हमें जन्नत से जहन्नम की और ले जाय जे

आओ अल्लाह से एक दुआ करते है या अल्लाह हम

तेरी इबादत का हक़्क़ अदा न कर सके हम

ऐसी इबादत रमजान में न कर सके

जैसा उसका हक़्क़ था हमने बोहत काम इबादत की

या अल्लाह फिर भी तू हमारी उस इबादत

को क़ुबूल फार्मले और हमें माफ़ कर दे

अयेन्दा रमजान हमें नसीब फरमाना

ताकि हमने जो वक़्त इस रमजान में

इबादत से महरूमी में गुज़ारा

उस तरह अयेन्दा न गुज़रे

और हम अगले साल तेरी खूब इबादत करे

हमें बख्श दे तू रहीम है

हम पर रहें फार्मा हमारे लिए

अपनी रेहमत के दरवाज़े खोल दे

और हमारे सगीरा, कबीरह गुनाहों

को माफ़ फार्मा और हमें जन्नत में

अपना दीदार आता फरमाना मौला और अपने

हबीब (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का पड़ोस हमें जन्नत में आता फरमाना

या रब्बे करीम हम पर अपना ख़ास करम फार्मा

आमीन सुम्मा आमीन

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