ज़कात पहनने के जेवरात की ज़कात

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Pahanne ke Zewraat ki zakat

ज़कात पहनने के जेवरात की ज़कात

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

मफ़हूमे-हदीस: पहनने के जेवरात की ज़कात

अमर इब्न अल-‘अस रदी अल्लाहु अन्हु से रिवायत है की एक औरत रसूल-अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के पास आयी उसकी बेटी भी उसके साथ थी

और उसकी बेटी के हाथ में सोने (gold) के दो बड़े बड़े कंगन थे आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने पूछा क्या आप इन कंगना की ज़कात देते हो?

उसने कहा नहीं, आप  (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) में ने फ़रमाया क्या आपको ये पसन्द है

की क़यामत के दिन अल्लाह आपको आग के कंगन पहनाये ये सुनकर उसने उसी वक़्त कंगन उतार दिए

और आपकी खिदमत में पेश करते हुए कहा की ये अल्लाह और उसके रसूल-अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के लिए है

(सुनें अबू दावूद, जिल्द 1, 1550-हसन)

अब्दुल्लाह बिन शद्दाद रदी अल्लाहु अन्हु से रिवायत है की हम लोग ऐसा रदी अल्लाहु अन्हा से पास गए

वो कहने लगी मेरे पास रसूल-अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) आये आपने मेरे हाथ में चाँदी की अंगूठियां देखी और फ़रमाया, ऐसा ये क्या है?

मैंने अर्ज़ किया की ये मैंने इसलिए बनवाई है की आपके लिए बनाओ सिंगर करु,

आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने पूछा, क्या आप इनकी ज़कात अदा करती हो मैंने कहा नहीं, या जो अल्लाह को मंज़ूर था

कहा आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया ये आपको जहन्नम में जे जाने के लिए काफी है (अगर आप ज़कात नहीं दोगी तो)

(सुनें अबू दावूद, जिल्द 1, 1552-सहीह)

ایک عورت رسول اللہ صلی اللہ علیہ وسلم کی خدمت میں حاضر ہوئی، اس کے ساتھ اس کی ایک بچی تھی، اس بچی کے ہاتھ میں سونے کے دو موٹے موٹے کنگن تھے، آپ صلی اللہ علیہ وسلم نے اس سے پوچھا: کیا تم ان کی زکاۃ دیتی ہو؟ اس نے کہا: نہیں، آپ صلی اللہ علیہ وسلم نے فرمایا: کیا تمہیں یہ اچھا لگے گا کہ قیامت کے روز اللہ تعالیٰ تمہیں آگ کے دو کنگن ان کے بدلے میں پہنائے ۔ عبداللہ بن عمرو بن العاص رضی اللہ عنہما کہتے ہیں کہ اس عورت نے دونوں کنگن اتار کر انہیں رسول اللہ صلی اللہ علیہ وسلم کے سامنے ڈال دئیے اور بولی: یہ اللہ اور اس کے رسول کے لیے ہیں۔
سنن ابی داؤد جلد ۱ ۱۵۵۰ حسن

عبدالله بن شداد سے روایت ہے ہم لوگ ام المؤمنین عائشہ رضی اللہ عنہا کے پاس گئے، وہ کہنے لگیں: میرے پاس رسول اللہ صلی اللہ علیہ وسلم آئے، آپ نے میرے ہاتھ میں چاندی کی کچھ انگوٹھیاں دیکھیں اور فرمایا: عائشہ! یہ کیا ہے؟ میں نے عرض کیا: میں نے انہیں اس لیے بنوایا ہے کہ میں آپ کے لیے بناؤ سنگار کروں، آپ صلی اللہ علیہ وسلم نے پوچھا: کیا تم ان کی زکاۃ ادا کرتی ہو؟ میں نے کہا: نہیں، یا جو کچھ اللہ کو منظور تھا کہا، آپ صلی اللہ علیہ وسلم نے فرمایا: یہ تمہیں جہنم میں لے جانے کے لیے کافی ہیں ۔
سنن ابی داؤد جلد ۱ ۱۵۵۲ حسن

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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