ज़कात न देने की सज़ा

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Zakaat Na Dene Ki Saza
Sadqa Gunaahon
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Zakaat Na Dene Ki Saza

ज़कात न देने की सज़ा

ज़कात इस्लाम की 5 बुनियादी बातों में से एक बात है, और ज़कात देना फ़र्ज़ है.

जो इंसान ज़कात नहीं देता वो गुनहगार है और मरने के बाद ऐसे लोगो को बहुत बड़ा अज़ाब भुगतना होगा,

जिसके पास सोना या चांदी हो और उसकी ज़कात न देता हो, ऐसे इंसान के लिए क़यामत के दिन आग की तख्तियां बनाई जाएगी

फिर उनको दोज़ख की आग में गरम कर के उसके दोनों करु नातो, पेशानी, और पीठ पर दागी जाएगी, और जब ये ठंडी हो जाएगी तो फिर गर्म कर ली जाएगी.

जो अपने माल की ज़कात नहीं देता, अकेहरात में उसके माल को एक ज़हरीला, बड़ा, गांजा सांप बना दिया जाएगा और ज़कात न देने वाले की गर्दन में डाल दिया जाएगा,

वो सांप उसके दोनों जबड़े नोचेगा और कहेगा, में ही (दुनिया में) तेरा माल था, में ही तेरा खज़ाना था.

भाइयो-बहनो, थोड़े से रूपये बचने के लिए भला इतने बड़े-बड़े अज़ाब कौन सहन कर सकता है,

और हमको तो अल्लाह ने जो माल दिया है उसका सिर्फ 2.5% ही तो ज़कात में देना है, बाकी 97.5% तो अपने पास ही रखना है.

अल्लाह के दिए माल को अल्लाह के ही कहने पर न देना अच्छी बात नहीं. ज़कात देने से अल्लाह का हुक्म पूरा होता है और हमको सवाब भी मिलता है,

ज़कात से हमारा सारा माल पाक साफ़ हो जाता है, अल्लाह हमारे माल में बरकत देता है,

जिस माल/सोना/चांदी की ज़कात दी जाती है उसको पानी डूबा नहीं सकता, छोड़ चुरा नहीं सकता और आग जला नहीं सकती,

अल्लाह उसकी हिफाज़त करता है.अल्लाह हर इन्सान को इस्लाम को समझने और उस पर अमल करने वाला बना दे. आमीन.

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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