औरत पर ग़ुस्ल कब फ़र्ज़ होता है

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AURAT PAR GUSL KAB FARZ HOTA HAI
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AURAT PAR GUSL KAB FARZ HOTA HAI

औरत पर ग़ुस्ल कब फ़र्ज़ होता है

औरत पर ग़ुस्ल कब फ़र्ज़ होता है

हैज़ (माहवारी, M.C. Period,निफ़ास,इस्तिहाज़ा का बयान

बालिग औरत के आगे के मक़ाम से जो खून आदि तौर पर निकलता है और वो बीमारी या बच्चा पैदा होने की वजह से न हो उसे हैज़ कहते है.

बच्चा होने के बाद हो तो निफ़ास कहते है

(क़ानून-ए-शरीअत हिस्सा 1 सफा 61)

निफ़ास यानी वह खून जो बच्चा जानने के बाद आता है इसकी कमी की जानिब कोई मुद्दत मुक़र्रर नहीं.

आधे से ज्यादा बच्चा निकलने के बाद 1 आन भी खून आया तो वह निफ़ास है और ज्यादा से ज्यादा निफ़ास का ज़माना 40 दिन-रात है.

(क़ानून-ए-शरीअत हिस्सा 1 सफा 63)

हैज़ व निफ़ास की हालत में नमाज़ पढ़ना रोज़ा रखना हराम है. इन दिनों में नमाज़े माफ़ है इनकी कज़ा भी नहीं. रोज़ो की कज़ा रखना फ़र्ज़ है

(क़ानून-ए-शरीअत हिस्सा 1 सफा 64)

इस्तेहाज़ा:

वह खून जो औरत के आगे के मक़ाम से निकले और हैज़ व निफ़ास का न हो तो ये इस्तिहाज़ा है.

(क़ानून-ए-शरीअत हिस्सा 1 सफा 65)

इस्तेहाज़ा में न नमाज़ माफ़ है न रोज़ा माफ़ है.ऐसी औरत से सोहबत हराम है (क़ानून-ए-शरीअत हिस्सा 1 सफा 65)

तो औरतो से अलग रहो हैज़ के दिनों, और उनसे नजदीकी न करो जब तक वो पाक न होल.फिर जब पाक हो जाये तो उनके पास जाओ.

(कंज़ुल इमां पारा 2,सौराह बकर,आयत 222)

हैज़ की मुद्दत कम से कम 3 दिन और 3 राते है.यानी 72 घंटे है और ज्यादा से ज्यादा 10 दिन और राते है.

(बहरे शरीअत जिल्द1 सफा 42)

हैज़ की हालत में औरत से सोहबत (Sambhog-Sex) करना हराम है (तिर्मिज़ी जिल्द 1 सफा 136,बहरे शरीअत)

10 दिन से कम में खून आना बंद हो गया तो जब तक ग़ुस्ल न करे सोहबत जाइज़ नहीं (बहरे शरीअत जिल्द 1,सफा 74)

औरत को जब हैज़ का खून आना बंद हो जाये तो उसे ग़ुस्ल करना फ़र्ज़ है (कानून-ए-शरीअत जिल्द 1,सफा 38)

हैज़ से पाक होने का तरीक़ा:

उम्मुलमोमेनिन हज़रात आयशा सिद्दीक़ा रदिअल्लहु अन्हा से रिवायत है की एक औरत रसूलल्लाह सल्ललाहु अलैहि वसल्लम से हैज़ के ग़ुस्ल के बारे में पूछा.आपने उसे बताया:

यु ग़ुस्ल करे.और फिर फ़रमाया मुश्क (कस्तूरी) से बना हुआ रुई का फाय ले और उससे तहारत हासिल कर वो समाज न सकीय और कहा किस तरह तहारत करू?  हुज़ूर ने फ़रमाया सुब्हानल्लाह उससे तहारत करो

हज़रात आयशा फरमाती है

मेने उस औरत को अपनी तरफ खींच लिया और उसे बताया की उसे खून के मुकाम पर फेरे. (बुखारी शरीफ जिल्द 1 बाब 215 हदीस 305 सफा 201)

नोट:

इस ज़माने में मुश्क मिलना मुश्किल है इसलिए उसकी जगह गुलाब पानी या इतरा का फाय ले.फिर ग़ुस्ल करे.

अल्लाह तआला इन सारे मसाइल को हमें समझने याद रखने और उससे भी ज़्यादा अमल की तौफ़ीक़ अता फरमाए आमीन

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