विलादत ए आला हज़रात

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ALLAH Ki Zaat O Sifaat
Allah
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SAHABAWiladat E Aala Hazrat

विलादत ए आला हज़रात

كعبے کے بدرالرجی تم پے کروڑوں درود

طیبہ کے شمش الضحی تم پے کروڑوں درود

कनीज़-ए-तजश शरीया (GRP)

विलादत बा सआदत और करामात ए आलाहज़रत

(स्पेशल पोस्ट)

आला’हज़रात मौलाना अहमद राजा खान साहिब की पैदाइश से क़ब्ल एक साहिब मौलाना राजा अली खान जो के आपके दादा जान थे के पास हाज़िर हुए,

उन्होंने आप के गोष गुज़र एक ख्वाब जिस में उनका ज़िकर भी था,यानी यह ख्वाब हज़रात मौलाना राजा अली खान से ही तालुक रखता था.

चूंकि ख्वाबो की ताबीर बताने में आप एक बुलंद दर्जा रखते थे इसिलए लोग जब कोई गैर मामूल ख्वाब देखते तो फ़ौरन आप से रुजू करते

रिवायत है के आपने ख्वाब सुन कर तबस्सुम फ़रमाया और उन साहब से फ़रमाया के भाई अभी उस ख्वाब की ताबीर बताने का वक्त नहीं आया जब ताबीर ज़ाहिर होगी तो हम तुम्हे खुद ही बतला देंगे.

वो साहिब यह जवाब सुनकर खामोश रहे और उसी इंतज़ार में रहे के ज़रा देखे तो उस ख्वाब की ताबीर क्या बार आमद होती है.

फिर जब आलाहज़रत पैदा हुए तो हज़रात राजा अली खान साहब ने उन्ही साहिब को तालाब फ़रमाया और उनको बतलाया के उस दिन जो तुम ने ख्वाब सुनाइए थे यही है उसकी ताबीर.

उन साहब की तस्सली व तश्फी होगी और उनको अपने ख्वाब की ताबीर भी मिल गयी. वो यह वाक़िअ काफी आरसे तक लोगो को सुनते रहे.

हज़रात राजा अली खान ने इसी मजलिस में फ़रमाया “सुनो इन्शाअल्लाह ताल्लाह बड़ा ज़बरदस्त आलिमे-दीन होगा और उससे दीन बड़ी दूर तक फैलेगा”.

ये बशारत सुनकर तमाम अहले खाना में ख़ुशी के अबार दौर गयी के उनके घर एक ऐसा आलिमे दीन पैदा हुवा है के जिसकी बदौलत उन सबको इज़्ज़त व टक्रीम हासिल होगी.

आपकी विलादत बा सआदत 1856 में बरैली शरीफ में हुई

यही दौर अहले इस्लाम के लिए दौरे इब्तिला से किसी तरह काम न था मुल्क में अजीब क़िस्म की अफरा तफरी पहली हुवी थी, अँगरेज़ अपनी सियासत और तदबीर के ज़रिये पुरे हिंदुस्तान पर क़ब्ज़ा करता चला जारहा था,

आप की विलादत के महज़ एक बरस के बाद ही जुंग आज़ादी लड़ी गयी और इसमे फतह के बाद अंग्रेज़ो ने अहले इस्लाम पर ज़ुल्म और बारबारिद की इन्तिहा कर डाली क्यों उस जुंग मै फ़क़त मुसलमानो ने है बरचर कर हिस्सा लिया था.

लाज़मी बात है के जब अँगरेज़ खुल तोर पर हिंदुस्तान पर क़ाबिज़ होगया तो उसने मुसलमान को है नुकसान पोहचाना था

इन पर आशोब हालत मै आपकी विलादत बा सआदत हुवी.

एक बात और अर्ज़ करते हूँ के इन हालत मै अंग्रेज़ो ने इस्लाम मै तफार्रुका डालने का मानसुहाद बनाया और अपनी मर्ज़ी के उल्माए दीन को इस सिलसिले मै खूब खूब इस्तेमाल किया .

लेकिन क़ुदरते कामिला ने इनके सदबाब के लिए एक मर्दे जलील इसी दौर मै पैदा फ़रमाया जिसको फेहम वो फरसत उन सबसे बुलन्दतर दर्जे की हामिल थी

करामात ए आलाहज़रत

एक बार आप रेल से पीलीभीत शरीफ से बरैली शरीफ जा रहे थे.

रास्ते मै नवाबगंज स्टेशन पर ट्रेन एक से 2 मिनट के लिए रुकी

मग़रिब का वक़्त हो चूका था.

आप अपने साथियो के साथ नमाज़ के लिए प्लेटफार्म पर उतर गए.

साथी परेशान थे के ट्रैन चली जायेगी तो क्या होगा? लेकिन आप ने इत्मीनान से अज़ान दिलवा कर बा जमात नमाज़ शुरू कर दी.

उधर ड्राइवर ट्रैन का इंजन चालू करता है लेकिन ट्रैन नहीं चलती. इंजन उछलता और फिर पटरी पर गिरजाता है.

T.T, स्टेशन मास्टर, वगैरह सब लोग जमा हो गए. ड्राइवर ने बताया की इंजन मै कोई खराबी नहीं है.

अचानक एक पंडित चिक उठा “वो देखो कोई दरवेश नमाज़ पढ़ रहा है ,

शायद ट्रैन इसी वजह से नहीं चलती?” ये सुनकै लोग आला हज़रात رضي الله عنه के इर्द गिर्द जमा हो गए.

आप इत्मीनान से नमाज़ मुकम्मल कर के जैसे है अपने साथ रेल मै सवार हुवे तो रेल चालू हो गयी और आगे बढ़ी.

अग्लो ने तो लिखा है बहुत इल्म-ए-दीन पर, जो कुछ है इस सदी मै वह तनहा राजा का है.

इस दौरे पुरफटन मै नज़र खुश-अकीदगी,

सर्कार का करम है वसीला राजा का है.

आज 10 शव्वाल है आला हज़रात की विलादत बा सआदत का दिन आला हज़रात अज़ीम उल बरकत को इसाले सवाब पोहचाये

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