खुश-ए-जन्नत–हिकायत

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Khosha-e-Jannat – Hiqayat

खुश-ए-जन्नत–हिकायत

एक दफा हुज़ूर सवार-ए-आलम सल्लल्लाहु-तआला-अलैहि-वसल्लम ने नमाज़ पढ़ते हुए अपना हाथ मुबारक बढ़ाया जैसे की आप कुछ पकड़ना चाहते हैं!

फिर आपने अपना हाथ मुबारक रोक लिया! सहाबा-ए-किराम रदी-अल्लाहु-तआला-अन्हुम ने अर्ज़ किया, या रसूलल्लाह! हमने आपको अपने हाथ मुबारक बढ़ाते हुए और फिर रोकते हुए देखा हैं,

क्या बात थी? हुज़ूर सर्वर-ए-आलम (सल्लल्लाहु-तआला-अलैहि-वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया-

मैंने जन्नत को देखा और जन्नत के एक ख़ोशे को पकड़ा अगर उस ख़ोशे को मैं तोड़ लता तो तुम रहती दुनिया तक उस ख़ोशे मे कहते रहते!

(मुस्लिम शरीफ, जिल्द-1,पेज-298)

सबक:

हमारे हुज़ूर सर्वर-ए-आलम नूर-ए-मुजस्सम (सल्लल्लाहु-तआला-अलैहि-वसल्लम) आलम के मुख़्तार हैं,

जन्नत सतहों आसमानो के ऊपर हैं! मगर हुज़ूर सर्वर-ए-आलम (सल्लल्लाहु-तआला-अलैहि-वसल्लम) की मुबारक आँखें मदीना मुआव्वारा की ज़मीन से सतहों आसमानो के भी ऊपर की चीज़ को देख लेती हैं!

फिर जो शख्स बगैर ऐनक (Chashme) के 7 इंच दूर की भी चीज़ न देख सके वो हुज़ूर (सल्लल्लाहु-तआला-अलैहि-वसल्लम) की मिस्ल बने तो किस-क़द्र जहालत हैं?

यह भी मालूम हुआ की हमारे हुज़ूर (सल्लल्लाहु-तआला-अलैहि-वसल्लम) मदीना मुनव्वरा मे रहकर सतहों आसमानो के पार की भी चीज़ पकड़ सकते हैं!

यह भी मालूम हुआ की हुज़ूर (सल्लल्लाहु-तआला-अलैहि-वसल्लम) जन्नत के मालिक हैं!

इसलिए तो आपने जन्नत मे हाथ बढ़ाकर जन्नत के ख़ोशे को पकड़ लिया वरना पराये चीपेस्ट जेनेरिक वियाग्रा घर मे कोई हाथ डालकर तो दिखाए! किसी दूसरे की चीज़ कोई उठाकर तो दिखाए!

यह भी मालूम हुआ की हमारे हुज़ूर (सल्लल्लाहु-तआला-अलैहि-वसल्लम) मुख़्तार भी हैं,

इसलिए तो फ़रमाया, की अगर मैं चाहते तो ख़ोशे को तोड़ लता!

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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