अल्लाह की ज़ात और सिफ़ात

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ALLAH Ki Zaat O Sifaat
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ALLAH Ki Zaat O Sifaat

अल्लाह की ज़ात और सिफ़ात

1) तमाम आलम ज़मीन और आसमान वगेरा सारा जहाँ पहले बिलकुल नापैद (पहले नहीं था, बाद में तक्लीक किया गया) था,

कोई चीज़ भी नहीं थी, फिर अल्लाह ने अपने क़ुदरत से सबको पैदा किया तो यह सब कुछ मुजूद हुआ.

(شرح العقائد النسفیۃ ، مبحث العالم بجمیع اجزائہ محدث ، ص۲۴ / پ۷،الانعام : ۱۰۱ )

2) जिसने तमाम आलम और दूसरे जहाँ को पैदा किया, उसी पाक ज़ात का नाम अल्लाह है.

(پ۱،البقرۃ:۲۹/ پ۷،الانعام:۱/پ۲۴،المؤمنون:۶۲/ المسامرۃ بشرح المسایرۃ، الاصل العاشر العلم بانہ تعالیٰ واحدلاشریک لہ،ص۴۴)

(3) अल्लाह अज़ा व जल्ला एक है, कोई उसका शरीक नहीं.

(پ۲۶،محمد:۱۹/پ۱۵،الکھف:۲۶)

हमेशा से हैं, और हमेशा रहेगा.

(المسامرۃ بشرح المسایرۃ ، الاصل الثانی : اللہ قدیم ، ص۲۲۔۲۵)

वह बे-परवा है किसी का मुहताज नहीं. सारा आलम उसका मुहताज है.

(شرح الملا علی القاری علی الفقہ الاکبر ، لایثبہ اللہ شئی من خلقہ، ص۱۵/ پ۲۶، محمد:۳۸)

कोई चीज़ इसके मिसाल नहीं, वह सब से यकता और सब के निराला है. (پ۲۵،الشورٰی :۱۱/پ۳۰،الاخلاص:۱۔۴)

और वही सब का ख़ालिक़ व मालिक हैं.

(پ۷،المائدۃ:۱۲۰/پ۷،الانعام:۱۰۲)

(4) वह ज़िन्दा है.

(پ۳،البقرۃ:۲۵۵)

वह क़ुदरत वाला है, वो हर चीज़ को जनता है.

(پ۲۲،فاطر:۴۴)

सब कुछ देखता है, सब कुछ सुनता है.

(پ۲۵،الشورٰی:۱۱)

सब की ज़िन्दगी और मौत का मालिक है. जिसको चाहे ज़िन्दा रखे जब तक चाहे ज़िन्दा रखे.

और जब चाहे मौत दे. वही सब को जिल्लत है और मरता है.

(پ۱۱،التوبۃ:۱۱۶)

वही सब को रोज़ी देता है, वही जिसको चाहे इज़्ज़त और ज़िल्लत देता है.

(پ۳،اٰل عمران:۲۶،۳۷)

और वह कुछ चाहे करता है.

(پ۱۷،الحج:۱۸)

वही इबाद्दत के लाइक है.

(پ۳،البقرۃ:۲۵۵)

कोई इसका मिसाल और मुक़ाबिल नहीं.

(پ۲۵،الشورٰی:۱۱)

ना इसने किसी को जानना, न वह किसी से जानना गया.

(پ۳۰،الاخلاص:۳)

ना वह बीवी बच्चो वाला है.

(پ۲۹،الجن:۳)

5) वह कलाम फरमाता हैं.

(پ۳،البقرۃ:۲۵۳)

लेकिन इसका कलाम हम लोगों के कलाम की तरह का नहीं है,

वह ज़बान, आंख, कान, वगेरा, आज़ा से और हर ऐब और नुकसान से पाक है. हर कमाल उसकी ज़ात में मुजूद है.

(المسامرہ بشرح المسایرۃ ،ختم المصنف ، کتاب بیان عقیدۃ اہل السنۃ ، ص۳۹۲۔۳۹۳)

6) उसकी सब सिफ़ाते हमेशा से हैं, और हमेशा रहेंगी, कोई सिफ़ात इसकी कभी न खत्म हो सकती है, ना घट्ट – बढ़ सकती हैं.

(المعتقد المنتقد مع المستند المعتمد ، مسئلۃ صفاتہ تعالیٰ غیر محدثۃ ولا مخلوقۃ ، ص۴۹/شرح العقائد النسفیۃ ، مبحٹ اثبات الصفات ، ص۴۵۔۴۷)

(7) वह अपनी पैदा की हुई हर चीज़ पर बढ़ा मेहरबान है, वही सब को पाल्टा है.

(پ۱،الفاتحۃ:۱۔۲)

वह बड़ाई वाला और बड़ी इज़्ज़त वाला हैं.

(پ۲۸،الحشر:۲۳)

सब कुछ इसी के क़ब्ज़ा और इख़्तियार में हैं. जिसको चाहे पेस्ट कर दे, जिसको चाहे बुलन्द कर दे.

(پ۳،اٰل عمران:۲۶)

जिसकी चाहे रोज़ी कम कर दे, जिसकी चाहे ज़ायदा कर दे.

(پ۲۱،العنکبوت:۶۲)

वह इन्साफ वाला है.

(شعب الایمان ، باب فی الایمان باللہ ، فصل فی معرفۃ اسماء اللہ وصفاتہ ،رقم ۱۰۲،ج۱،ص۱۱۴)

किसी पर ज़ुल्म नहीं करता.

(پ۵،النسا:۴۰ / پ۱۵، الکہف:۴۹)

वह बड़े तहम्मुल और बर्दाश्त वाला है.

(شعب الایمان ، باب فی الایمان باللہ ، فصل فی معرفۃ اسماء اللہ وصفاتہ ،رقم ۱۰۲،ج۱،ص۱۱۴)

वह गुनाहो का बख्श ने वाला है.

(پ۲۴،الزمر:۵۳)

और बन्दों की दुआओं को क़बूल फरमाने वाला हैं.

(پ۲۰،النمل:۶۲/پ۲،البقرۃ:۱۸۶)

वह सब पर हाकिम है, इस पर कोई हुकुम चलाने वाला नहीं.

(پ۷،الانعام:۱۸/ پ۱۲،ھود:۴۵/المستند المعتمدعلی المعتقد المنتقد، ص۹۹،حاشیہ ۱۳۱)

ना इसको इसके इरादे से कोई रुकने वाला हैं.

(پ۲۶،ق:۲۹)

वो सब का काम बनाना वाला हैं. दुनिया में जो कुछ होता हैं, उसी के हुक्म से होता हैं,

बगैर उसके हुक्म के कोई ज़र्रा हिल नहीं सकता. इसके किसी हुक्म और इसके किसी काम में किसी को रुख टोक की मज्जाल नहीं.

(بہارشریعت،ج۱،ص۸)

वो तमाम आलम और सारे जहाँ की हिफाज़त और इसका इंतज़ाम फरमाता हैं.

(پ۱۳،یوسف:۶۴/ پ۲۲،سبا:۲۱)

ना वह सूता हैं, ना ऊँघता हैं.

(پ۳،البقرۃ:۲۲۵)

ना कभी ग़ाफ़िल होता हैं.

(پ۲،البقرۃ:۱۴۴)

8) अल्लाह पर कोई चीज़ वाजिब और लाज़िम नहीं हैं. और वह जो कुछ करता हैं,

वह उसका फज़ल और उसकी मेहेरबानी हैं.

(المسامرۃ بشرح المسایرۃ ، الاصل الرابع فی بیان انہ لایجب علی اللہ تعالٰی فعل شی ، ص۱۵۴ المعتقد المنتقد مع المستند المعتمد ، یستحیل وجوب شی علیہ تعالٰی ، ص۷۱)

9) वह मख्लूक़ की तमाम सिफातो से पाक हैं.

(شرح الفقہ الاکبر،ص۳۱)

वह बरदा ही रहीम और करीम हैं . वो अपने बन्दों को किसी ऐसे काम का हुक्म नहीं देता जो बन्दों से ना हो सके.

(پ۳،البقرۃ:۲۸۶)

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