खुदा की तौहीद और उसके रसूलों पर ईमान लाने के सात सात फरिश्तों के वजूद पर भी ईमान लाना

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Khuda Ki Touhid Aur Uske Rasool’on Per Emaan Lane Ke Saat Saat Farishton
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Khuda Ki Touhid Aur Uske Rasool’on Per Emaan Lane Ke Saat Saat Farishton Ke Wajood Per Bhi Emaan Lana

फ़रिश्ते

(1) खुदा की तौहीद और उसके रसूलों पर ईमान लाने के सात सात फरिश्तों के वजूद पर भी ईमान लाना ज़रूरियाते दीन में से हैं. फ़रिश्तो के वुजूद का इंकार करना कुफ्र हैं.

(الفتاوی الرضویۃ الجدیدۃ ، ج۲۹،ص۳۸۴)

(2) अल्लाह ने अपनी कुछ मख़लूक़ात को नूर से पैदा कर के उनको हमारी नज़रो से छुपा दिया हैं और उनको यह ताकत दी हैं के वो जिस शकल में

चाहें उस शकल में ज़ाहिर हो जाएँ, वह कभी इंसान की शकल इख्तियार कर लेते हैं, और कभी दूसरी शकलों में ज़ाहिर होते हैं.

(الیواقیت والجواہر، المبحث التاسع والثلاثون فی بیان صفۃ الملا ئکۃ واجنحتھاوحقائقھا۔۔۔الخ،الجزء الثانی ،ص۲۹۵/النبراس،مبحث الملائکۃعلیہم السلام،ص۲۸۷)

(3) फ़रिश्ते अल्लाह की मासूम मख्लूक़ हैं वह वही करते हैं जो खुदा का हुक्म होता हैं वह खुदा के हुक्म के खिलाफ कभी कुछ नहीं करते. वह हर किसम के छोटे बर्डे गुनाहों से पाक हैं.

(پ۲۸،التحریم:۶/ النبراس،مبحث الملائکہ علیہم السلام، ص۲۸۷)

(4) अल्लाह ने इन फरिश्तों को मुख्तलिफ कामो में लगा दिया हैं और जिन जिन को जो काम करने का हुक्म दिया हैं वो इन कामो में लगे हुए हैं.

फरिश्तों की तादाद अल्लाह ही जनता हैं, जिसने उनको पैदा फ़रमाया हैं और अल्लाह के

बताने से रसूल भी जानते हैं. इन में चार फ़रिश्ते बहुत मशहूर हैं, जो सब फरिश्तों से अफ़ज़ाल और आयला हैं:-

A) जिब्राइल अलैहि सलाम B) हज़रात ए मैकईइल अलैहि सलाम C) हज़रात ए इस्राफील अलैहि सलाम D) हज़रात ए इज़राईल अलैहि सलाम.

(پ۳۰،النّٰزعٰت:۱۔۵ / التفسیر الکبیر، المسألۃ فی شرح کثرۃ الملائکۃ، ج۱،ص۳۸۶)

5) किसी फ़रिश्ते की शान में अदना सी ग़ुस्ताख़ी करने से आदमी काफिर हो जाता हैं.

(مجمع الانھر، کتاب السیر والجھاد، باب المرتد، ثم ان الفاظ الکفر انواع، ج۲،ص۵۰۷/ البحرالرائق، کتاب السیر ، باب احکام المرتدین ، ج۵،ص۲۰۴۔۲۰۵)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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