हर बीमारी की दवा है, जानिए

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HAr BIMARI KI DAWA HAI
sallallahu alaihi wasallam
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हर बीमारी की दवा है

HAr BIMARI KI DAWA HAI

अल्लाह तबारक वा तआला ही हक़ीक़त में शाफिययूल अमराज़ यानी बीमारियों में शिफा देने वाला है!

सभी जानते है की बाज़ अवक़ात बड़े बड़े माहिर तबीब (dr.) बेहतरीन दवाएं देते है हैं

मगर “मर्ज़ भड़ता गया जो जो दवा की” के मिस्दाक़ मर्ज़ में मुसलसल (रेगुलर) इज़ाफ़ा होता और बिल आखिर मरीज़ दम तोड़ देता है!

मुस्लिम शरीफ में है! अल्लाह عزوجل के हबीब صَلَّی اللّٰهُ تَعَالٰی عَلَيهِ وَسَلَّم का फरमाने सिहत निशान है:

हर बीमारी की दवा है, जब दवा बीमारी तक पहुंचा दी जाती है तो अल्लाह عزوجل के हुक्म से मरीज़ अच्छा हो जाता है

(मुस्लिम शरीफ)

कोई मर्ज़ ला इलाज नहीं

इस हदीसे पाक से डॉक्टरों के इस कौल की भी तरदीद हो गयी की कैंसर या फुला बीमारी ला इलाज है!

यक़ीनन भूड़ापे और मौत के सिवा कोई ऐसी बीमारी ही नहीं जसकी दवा न हो! है यह बात अलग है

की कई अमराज़ का इलाज अतिब्बा (dr.) अब तक दरयाफ्त (dhun) नहीं पाए!

बाहर हाल रब्बे जल जलाल جَلَّ جلالهُ चाहे तो दवा शिफा का ज़रिए बने वर्ना ऍन मुमकिन है

की वही दवा मौत का सबब बन जाये! और यह भी अक्सर देखा जाता है

की माहिर डॉक्टर की तरफ से मिलने वाली सही दवा के बा वुजूद किसी किसी मरीज़ को मांफी असर (reaction) हो जाता

और वह मज़ीद शदीद बीमार माज़ूर या फौत हो जाता और फिर बाज़ लोगो की जहालत के बाइज़ बेचारे डॉक्टर की सहमत आ जाती है!

शिफा मिलने न मिलने का राज़

मुफ़स्सिरे कुरआन, हकीमुल उम्मत हज़रते अहमद यार खान عَلَيهِ رَحمَةُاللّٰهِ المَنَّان मज़कूरा हदीसे पाक के तहत मीर आत शेयर मिश्कत जिल्द 6 सफ़ा 214 पर साहिबे मिरकात رَحمَةُاللّٰهِ تَعَالٰی عَلَیه के हवाले से नक़ल फरमाते है:

जब अल्लाह عزوجل किसी बीमारी की शिफा नहीं चाहता तो दवा और मर्ज़ के दर्मियान एक फरिश्ते के ज़रिये आध कर देता है

जिसकी वजह से दवा मर्ज़ पर वाक़े (असर) नहीं होती, जब शिफा का इरादा होता है

तो वह पर्दा हटा दिया जाता है जिस से दवा मर्ज़ पर वाक़े (असर) होती है और शिफा हो जाती है!”

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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