ऑपरेशन से बच्चे होने की क्या वजह है क्यों होते है ऑपरेशन से बच्चे आइये जानते है

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PRETION SE BACHE HONE KI KYA VAJAH HAI KYUN HOTE HAI OPRETION SE BACHE AAIYE JANTE HAI YEH

ऑपरेशन से बच्चे होने की एक वजह

घरेलु इलाज

ऑपरेशन से बच्चे होने की एक वजह

ऑपरेशन से बच्चे होने की क्या वजह है क्यों होते है ऑपरेशन से बच्चे आइये जानते है यह पोस्ट पढ़के

कूल्हे की हड्डी उमूमन पहली हुई और छोड़ी होती है! मर्दो के मुक़ाबले में औरतो में कुदरती तौर पर यह चीज़ ज़ियादा होती है

ताकि आगे चल कर बचे की विलादत में सहूलत हो! विटामिन D3 की कमी की वजह से कूल्हे की हड्डी की सहीह नाशवो नुमा नहीं होती और ये बजाये फैलने के सुकड़ जाती है

जिससे पैदाइश का रास्ता तंग हो जाता है और ख़वातीन को बच्चों की वेलादत के वक़्त तरह तरह की परेशानियों का सामना होता है

और आखिर कार ऑपरेशन करना पढता है! आज कल बच्चे की विलादत के वक़्त बा कसरत ऑपरेशन हो रहे हैं उनकी एक बढ़ी वजह इनके कूल्हे की हड्डी का सुकड़ा होना है

बच्चों को अंडे की ज़र्दी खिलाइये

बच्चों को आयन्दा की मुसीबतों से बचने के लिए ज़रूरी है की एक या दो माह की उम्र ही से मुनासिब धुप मुहैया की जाये

और 4 माह की उम्र से ग़िज़ा में अण्डे की ज़र्दी भी इस्तेमाल करवाई जाये!

धुप हासिल करने का तरीका

तुल्ये आफ़ताब के दौरान बाद और गुरुबे आफ़ताब के आखिरी लम्हात में काम अज़ काम 12,12 मिनट के लिए

(मौसम के लिहाज़ से वक़्त में कमी बेशी कर के) बच्चे को ऐसी जगह लिताइये या बिठाइये जहा मोकम्मल धुप आती हो,

हर उम्र में धुप खाना ज़रूरी है लिहाज़ा इन्ही अवक़ात में हर एक को इतनी डर ता मुकम्मल धुप में रहना चाहिए की खाल गर्म हो जाये!

बयान करदा अवक़ात बेहतरीन हैं, अगर न बन पढ़े तो दिन भर में किसी भी वक़्त में कुछ न कुछ धुप हासिल कर लें चाहिए।

अगर चयन में हों और धुप आनी शुरू हो जाये तो कुछ धुप और चयन में मत बैठिये बल्कि वह से हट जाइये या मुकम्मल धुप में आ जाइये]

या मुकम्मल चयन में! हज़रते सय्यिदना अबू हुरैरा (رضي الله تعالى عنه ) से रिवायत है,

सरकारे मदीन ए मुअव्वराह, सरदार मक्कए मुकर्रमा (صلى الله تعالى عليه وسلم ) का फरमाने शफ़क़त निशान है:

तुममे अगर कोई साये में बैठा हो और उस पर से साया हट जाये उसका कुछ हिस्सा धुप में और कुछ साये में हो जाये तो उस को चाहिए की वह से उठ खड़ा हो!

(सुनाने आबि दावूद)

हज़रते शहर हकीमुल उम्मत हज़रते मुफ़्ती अहमद यार खान (رحمت الله قوي) फरमाते है:

या तो साये में ही चला जाये या बिल्क़ुल धुप में हो जाये क्यों की साया ठंडा है

और धुप गर्म और बायक वक़्त एक जिस्म पर ठंण्डक वे गर्मी लेना सिहत के लिए मुज़िर (नुकसान देह) है

इस लिए ऐसा न करें नीज़ यह शैतानी निशस्त है जिससे शैतान खुश होता है लिहाज़ा इस तश्बीह से बचना ज़रूरी है!

(मिरात , जिल्द 6, सफ़्हा 387)

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