तंगदस्ती से निजात की दुआ

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tangdasti se Nijat Ki Dua
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tangdasti se Nijat Ki Dua

तंगदस्ती से निजात की दुआ

ghurbat se nijat ki dua

आज जो वज़ीफ़ा में बता रहा हूँ बहुत ही पॉवरफुल वज़ीफ़ा है, वज़ीफ़ा खत्म होने के साथ ही इन्शाअल्लाह ग़ुरबत भी खत्म हो जाये गई.

हद से ज़्यादा अगर तंगदस्त हो तो हुज़ूर पाक (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का बताया हुवा ये वज़ीफ़ा करें,

इन्शा अल्लाह आप के हालात वज़ीफ़ा खत्म होने के साथ ही बेहतर होना शरू हो जाएंगे.

हज़रात अबू हुरैरा (R.A) फरमाते हैं 1 दफा हुज़ूर पाक (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) हिम के साथ रास्ते पर चल रहा था

के इतने में 1 सहाबी (R.A) से मुलाक़ात होती है जो बहुत ज़्यादा परेशान थे,

आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने उन सहाबी (R.A) से पुछा आप ने ऐसी हालत कियोँ बनाई हुई है?

उन सहाबी (R.A) ने अर्ज़ किया ए अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) हिम में बहुत ज़्यादा तंगदस्त हूँ

तो आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फ़रमाया में तुम्हें ऐसी दुआ बताता हूँ

जिस को अगर तुम पढ़ो गए तो अल्लाह पाक तुम से तंगदस्ती उठा लें गए और तुम्हारी बीमारी भी दूर हो जाएगी,

तो हज़रात अबू हुरैरा (R.A) ने इरशाद फ़रमाया ए अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) मुझे वो दुआ हमें भी सीखा दें

ताकी हम भी इस को पढ़ें तो हुज़ूर पाक (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने उन को ये दुआ बताई.

“Tawakkaltu alal hayyilladhee la yamutu alhamdulillahilladhee

lam yattakhiz waladan walam yakun lahu shareekun filmulki walam yakun lahu

waliyyun minazzulli wa kabbirhu takbeera”

“( تَوَكَّلْتُ عَلَى الْحَيِّ الَّذِي لا يَمُوتُ ، وَالْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي لَمْ يَتَّخِذْ وَلَدًا ، وَلَمْ يَكُنْ لَهُ شَرِيكٌ فِي الْمُلْكِ ، وَلَمْ يَكُنْ لَهُ وَلِيُّ مِنَ الذُّلِّ ، وَكَبِّرْهُ تَكْبِيرًا )”

इस दुआ को सुबह और शाम जब भी टाइम मिले पढ़ते रहे इन्शाअल्लाह इस दुआ की बरकत से तंगदस्ती खत्म हो जाएगी.

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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2 COMMENTS

    • “Tawakkaltu alal hayyilladhee la yamutu alhamdulillahilladhee

      lam yattakhiz waladan walam yakun lahu shareekun filmulki walam yakun lahu

      waliyyun minazzulli wa kabbirhu takbeera”

      “( تَوَكَّلْتُ عَلَى الْحَيِّ الَّذِي لا يَمُوتُ ، وَالْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي لَمْ يَتَّخِذْ وَلَدًا ، وَلَمْ يَكُنْ لَهُ شَرِيكٌ فِي الْمُلْكِ ، وَلَمْ يَكُنْ لَهُ وَلِيُّ مِنَ الذُّلِّ ، وَكَبِّرْهُ تَكْبِيرًا )”

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