बीबी आमना की वफ़ात और हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के परवरिश

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BIBI AMNA KI WAFAT AUR HAZRAT MUHAMMAD SAW KE PARWARISH
sallallahu alaihi wasallam
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BIBI AMNA KI WAFAT AUR HAZRAT MUHAMMAD SAW KE PARWARISH

बीबी आमना की वफ़ात और हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के परवरिश

बीबी आमना की वफ़ात और दादा की परवरिश

फिर जब आप ﷺ वापिस आगे तो अब आप अपने दादा सरदार अब्दुल मुत्तलिब और अपनी माँ आमना के ज़ेर-ए-साया बड़ी तेज़ी से परवरिश पाते रहे.

और अल्लाह आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को खूब तरक़्क़ी आता करता रहा.

क्योँ के आप से दुनिया का अज़ीम मक़सद पूरा करवाना था.

फिर जब आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की आगे 6 साल को पहुंची तो आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की वालिदा बीबी आमना की वफ़ात हो गए,

और आप की परवरिश दादा अब्दुल मुत्तलिब ने बड़ी मुहब्बत से करना शरू की.

हज़रत अब्दुल मुत्तलिब के लिए खाना काबा के साये में मसनद-ए-आज़म (Royal sitting) बिछाए जाती थी,

जिस पर अब्दुल मुत्तलिब के सिवा कोई न बैठता था.

लेकिन हज़रत मुहम्मद बे-धारक उस पर जलवा-ए-अफ़रोज़ हो जाते और दादा भी आप को उस पर बैठने से मना न फरमाते थे,

बल्कि खुश होते थे. मक्काः के कुछ दाना लोग (wise people) अब्दुल मुत्तलिब से कहते:

इस (मुहम्मद) की हिफाज़त क्या करो, क्योँ के मक़ाम-ए-इब्राहिम पर जो हज़रत इब्राहिम (A.s) का क़दम है,

उस की शबाहत (resemblance) इस बच्चे के क़दम से बिलकुल मिलती जुलती है और किसी का क़दम इस के जैसा नहीं है”

एक दिन अब्दुल मुत्तलिब बैतुल्लाह में हिज्र-ए-अस्वद के क़रीब बैठे थे,

उस वक़्त उन के पास इसाईओं (Christians) का सब से बारे पादरी, बैठा हुआ था.

उस ने हज़रत मुहम्मद की नबूवत की वो वो निशानिएं बताईं और उन को देख कर कन्फर्म क्या के यही आखरी नबी होगा.

अब्दुल मुत्तलिब ने अपने बेतों को बुलाया कर कहा के तुम इस की (मुहम्मद की) पूरी तरह हिफाज़त करो क्योँ के तुम इस के बारे में सुनते जा रहे हो, क्या क्या कहा जाता है.

फिर जब हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) 8 साल की उम्र को पहुंचे तो दादा की वफ़ात हो गए.

फिर आप की परवरिश आप के चाचा अबू तालिब ने की, जो आप से बहुत मुहब्बत क्या करती थे.

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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