हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का फैसला

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Hazrat Muhammad Ka Faisla
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Hazrat Muhammad Ka Faisla

हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का फैसला

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का फैसला

रात भी लोगोँ ने इंतज़ार में गुज़ार दी के देखें अगर अबू वहब बखैर रहे तो हम भी काम करेंगे.

फिर अल्लाह अल्लाह कर के सुबह हुए तो सब ने उन को सही सलाम पाया.

तो सब के दिलोँ में हिम्मत की ढारस बन गए और सब बडिया हो गए.

हिज्र-ए-अस्वद के नस्ब के वक़्त क़ुरैश के क़बीले झगड पढ़े,

हत्ता के खून रेज़ी पर आमादा हो गए के ये मुबारक काम हम करेंगे.

फिर फैसला हुआ के जो शख्स अब मस्जिद के दरवाज़े से अन्दर हुआ,

उस है को सलीस और फैसला देने वाला बना लो.

और सब दरवाज़े पर नज़र जमा कर बैठ गए.

और क़ुदरत-ए-खुदा वन्दी के उस वक़्त रसूल ए अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का मुबारक सिरप दरवाज़े से ज़ाहिर हुआ

और क़ुरैश भी देख कर खुश हो गए और कहने लगे के बेशक ये शख्स अमानत-दार है.

जो भी फैसला करेंगे, हमे मंज़ूर होगा.

हज़ूर पाक ﷺ ने फ़रमाया, मेरे पास चादर लाओ.

लोग फ़ौरन एक चादर ले आये. फिर आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने अपने दस्त-ए-मुबारक से हिज्र-ए-अस्वद को उठा कर उस कपड़े के बीच रखा .

हर क़बीले के सरदार ने चादर का एक एक कार्नर थाम लिया और हज़ूर पाक (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया, सब ने शिरकत कर के अपनी अपनी दिली मुराद पा ली,

और फिर आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने पत्थर (हिज्र-ए-अस्वद) उठा कर उसको देवार में नस्ब फार्मा दिया.

और फिर उस के बाद ऊपर से (construction) continue हो गए.

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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