दिल का रोज़ा पेट के रोज़े से बेहतर, जानिए

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Dil ka Roza pait kay rozay say behtar

दिल का रोज़ा पेट के रोज़े से बेहतर

दिल का रोज़ा पेट के रोज़े से बेहतर है (हज़रात अली R.A) हज़रत अली (r.a) का ये क़ौल बहुत गहरी बात रखता है.

आजकल लोग रोज़ा तो रख लेते हैं पर ये ध्यान नहीं रखते के रोज़ा सिर्फ पेट का नहीं होता.

बल्कि रोज़ा जिस्म के सब अअज़ा या हिसून का होता है.

अगर एक इन्सान सिर्फ अपने पेट को भूखा रख कर सोया रहे तो ये रोज़ा नहीं होगा कियोंके ऐसा तो जानवर भी कर सकते हैं.

रोज़े मैं हक़ीक़ी चीज़ ये होती है के इन्सान का ध्यान अपने रब की तरफ हो और बेहयाई के कामों से बचे.

अगर कोई बुरी चीज़ देखे तो उस से मुंह फेर ले.

अल्लाह की इबादत करे और उसकी रज़ा हासिल करने की कोशिश करे.

नफ़्सानी कामों से बचने की मुमकिन हद तक बचने की कोशिश करे.

आँख का रोज़ा ये है के इन्सान बुरी चीज़ों को न देखे. कान का रोज़ा ये है के आदमी बुरी बातें न सुने,

हाथ का रोज़ा ये है के इन्सान नाप तोल मैं कमी बेशी न करे,

पेट का रोज़ा ये है के उसे भूखा रखे, पाऊं का रोज़ा ये है के बुराई की तरफ ले कर न जाये.

तो दोस्तों हमें चाईए के हम इन बातून पर गौर करें.

अगर आप दिल को बुरे ख़यालात से पाक रखते हैं और बुराई से बचते हैं तो ये आप के पेट के रोज़े से अफ़ज़ल है.

ये एक बहुत बड़ी बात है अगर इन्सान इसे समझने की कोशिश करे.

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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