सज्दा-ए-तिलावत और शैतान की सहमत

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Sajda e Tilawat aur Shaitan ki Shamat
muhamad
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Sajda e Tilawat aur Shaitan ki Shamat

सज्दा-ए-तिलावत और शैतान की सहमत

सज्दा ए तिलावत और शैतान की सहमत हदीस है के जब जब आदमी आयत से सज्दा पढ़ कर सज्दा करता है शैतान हैट जाता है

और रो रो कर कहता है मेरी बर्बादी इब्ने आदम को सज्दा का हुकुम हुआ उस ने सज्दा किया इस के लिए जन्नत है

और मुझे हुकुम हुआ मेने इंकार किया मेरे लिए दोज़ख है.

(सहीह मुस्लिम, जिल्द 1, पेज 61)

क़ुरान मजीद में कुल 14 सजदे हैं दोस्तों और जहाँ पे आयत खत्म होती है वहां पे सज्दा करने लाज़मी होता है.

और इसकी इतनी बरकत है के जब शैतान इन्सान को सज्दा ए तिलावत करते हुये देखता है तो भाग खड़ा होता है.

इस लिए के जब शैतान को हुकम होआ था सज्दा करने का तो उस ने इंकार कर दिया था

और जब इन्सान को हुकम दिए जाता है सज्दा ए तलवात मैं सज्दा करने का तो उसे चाईए के वो सज्दा करे और शैतान की तरह इंकार नहीं करे.

इसी मैं सब के लिए आफ़ियत है और बहुत सवाब है और अल्लाह की मुहबत भी नसीब होती है

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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