तोबा की क़बूलियत

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Aurato Ke Liye Ramazan Ke Kuch Khaas Masail
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toba ki Qabooliat

तौबा की क़बूलियत

किसी बज़ुर्ग से पूछा गया के जब बन्दा तौबा करता है तो किया उसे अपनी तौबा के मकबूल या ग़ैर मकबूल होने का पता चल जाता है?

کسی بزرگ سے پوچھا گیا کہ جب بندہ توبہ کرتا ہے تو کیا اُسے اپنی توبہ کے مقبول یا غیر مقبول ہونے کا پتا چل جاتا ہے؟ ان بزرگ نے فرمایا “ایسی مکمل بات تو نہیں البتہ کچھ نشانیاں ہیں جن سے توبہ کی قبولیّت کا پتہ چلتا ہے۔ وہ انسان اپنے آپ کو گناہوں سے پاک رکھتا ہے، ہَر دَم اللہ کو موجود سمجھنے لگتا ہے، نیکوں کے قریب اور بُروں سے دور رہنے لگتا ہے، دنیا کی تھوڑی سی نعمت کو عظیم اور آخرت کے لئے کثیر نیکیوں کو بھی قلیل سمجھتا ہے، اپنے دل کو ہر وقت فرائضِ خداوندی میں مصروف اور زبان کو بند رکھتا ہے، ہمیشہ اپنے گذشتہ گناہوں پر غور و فکر کرتا رہتا ہے اور “غم اور پریشانی کو اپنے لئے لازم کر لیتا ہے۔

حضرت امام غزالی کی کتاب مکاشفتہُ القلوب (باب نمبر10)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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