ईमान और अहतसाब के साथ रोज़े और क़ियाम रमजान का क्या मायने (Meaning) हैं?

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Imaan Aur Ahatsaab Ke Saath Roze Aur Qiyaame Ramzan Ka Kya MaAni (Meaning) Hain
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Imaan Aur Ahatsaab Ke Saath Roze Aur Qiyaame Ramzan Ka Kya MaAni (Meaning) Hain

सवालात ए रमजान

ईमान और अहतसाब के साथ रोज़े और क़ियाम रमजान का क्या मायने (Meaning) हैं?

हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु फरमाते हैं के अल्लाह के रसूल ने फ़रमाया,

जिसने ईमान और सवाब की नियत से रोज़ा रखा उसके पिछले गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं”

(बुखारी-38, मुस्लिम 1268)

हज़रात अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु फरमाते हैं के जनाबे रसूलुल्लाह ने फ़रमाया,

जिसने ईमान की बिना पर और सवाब की गरज़ से रमजान का क़ियाम किया उसके पिछले गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं”

(बुखारी -37,मुस्लिम -759)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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