क्या बच्चो पर रोज़ा फ़र्ज़ है, जानिए

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Kya Bachcho Per Roza Farz Hai
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Kya Bachcho Par Roza Farz Hai

क्या बच्चो पर रोज़ा फ़र्ज़ है,

अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया:-

“तीन लोगो से कलाम उठा लिया गया है, मजनूँ (पागल) यहाँ तक के उसका जूनून जाता रहे,

सोने वाला यहाँ तक के बेदार (जाग) हो जाये और बच्चा यहाँ तक के वो बालिग़ हो जाये,

(मुसनद अहमद, अबू दाऊद, हाकिम) रावी अली व उम्र

(सहीह जामिआ 3512)

मुसाफिर के लिए रोज़ा रखना बेहतर है या न रखना?

अल्लाह तआला ने फ़रमाया:- अगर तुममे से कोई मरीज़ हो या सफर में हो तो इतने दिन गईं कर बाद मैं रोज़ा रख ले”

(सौराह अल बक़रह-184)

हमजा बिन अमरो अस्लमी रज़ियल्लाहु अन्हु फरमाते हैं के उन्होंने कहा-

ए अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) मैं अपने अन्दर हालते सफर मैं रोज़ा रखने की क़ुव्वत पता हूँ,

तो (अगर मैं सफर मैं रोज़ा राखु ) तो क्या मुझ पर गुनाह है?

आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया:-

ये अल्लाह तआला की तरफ से रुखसत है, जो इसे ले ले तो उसके लिए बेहतर है और जो रोज़ा रखना चाहे तो उस पर कोई गुनाह नहीं

(मुस्लिम -1121)

एक रिवायत मैं यूँ है:- तुम्हारे लिए जो भी आसान हो करो,”

(तमाम फि फवैदह) सहीह- 2884

बुखारी की रिवायत मैं यूँ है :- अगर तुम चाहो तो रोज़ा रखो और चाहो तो अफ्तार करो (यानी चाहो तो रोज़ा न रखो)”

(बुखारी-1943)

लेकिन नहीं रखने वालो को बाद में उसकी क़ज़ा करना जरुरी है

 

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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