रोज़े की नियत,

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Roza Kholne aur Rakhne ki Dua
roze ki niyat
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सवालात ए रमजान

Roze Ki Niyat

रोज़े की नियत,

बेहतर ये है क रमजान के रोज़े की नियत सुबह सादिक़ से पहले कर ली जाये

अगर सुबह सादिक़ से पहले रोज़ा रखने का इरादा नहीं था सुबह सादिक़ के बाद इरादा हुआ क रोज़ा रख ही लेना चाहिए

तो अगर सुबह सादिक़ के बाद कुछ खाया पिया नहीं तो नियत सादिक़ के बाद करना सही है,

अगर कुछ खाया पिया नाह हो तो दोपहर से एक घंटा पहले तक रमजान के रोज़े की नियत कर सकते है,

रमजान के रोज़े में बस इतनी नियत कर लेना काफी है

क आज मेरा रोज़ा है या रात को नियत करना क सुबह रोज़ा रखना है,

रोज़े के लिए सेहरी खाना बा-बरकत है

क इससे दिन भर क़ुव्वत रहती है, मगर ये रोज़ा के सही होने के लिए शर्त नहीं,

अगर किसी को सेहरी खाने का मौक़ा नहीं मिला और सेहरी खाय बिना रोज़ा रख लिया

{और नियत कर लिया} तो भी सही है,

रमजान का रोज़ा रख कर तोड़ दिया तो क़ज़ा और कफ़्फ़ारा दोनों लाज़िम होंगे,

(आपके मसाइल और उनका हाल,262/3)

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