सालतुत तस्बीह का तरीक़ा,जानिए

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Salatut Tasbeeh Ka Tareeqa
Salatut Tasbeeh Ka Tareeqa
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Salatut Tasbeeh Ka Tareeqa

शाबान के फ़ज़ाइल मसाइल

सालतुत तस्बीह का तरीक़ा,

इसके दो तरीके मन्क़ूल है, किसी भी तरीके के मुताबिक़ ये नमाज़ पढ़ी जा सकती है,

पहला तरीक़ा,

इस नमाज़ को पढ़ने का तरीक़ा जो

हज़रात अब्दुल्लाह बिन मुबारक रहमतुल्लाहि, से तिर्मिज़ी शरीफ में मज़कूर है ये के, तक्बीरे तहरीमा यानी अल्लाहु अकबर के बाद सना यानी” सुब्हानका ल्लाहुम्मा” पढ़े फिर तस्बीह यानी

سُبْحَان اللهِ وَ الْحَمْدُ لِلّهِ وَ لآ اِلهَ اِلّا اللّهُ، وَ اللّهُ اَكْبَرُ

”सुब्हानल्लाही वाल हम्दुलिल्लाही व लाइलाहा इल्लल्लाहु वल्लाहु अकबर“ 15 मर्तबा पढ़े,

,أعوذ بالله من الشيطان الرجيم

आउजुबिल्लाही मिनाश शैतानीर राजिम ,”

ﺑِﺴْــــــــــــــــﻢِﷲِﺍﻟﺮَّﺣْﻤَﻦِﺍلرَّﺣِﻴﻢ

” बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम“ पढ़े फिर” अलहम्दु शरीफ और सूरत पढ़े, फिर क़याम में ही रुकू में जाने से पहले ही तस्बीह 10 मर्तबा पढ़े,

फिर रुकू करे और रुकू की तस्बीह के बाद वही कलमा 10 मर्तबा कहे,

फिर रुकू से उठ कर कोमा में” समी अल्लाह” के बाद 10 बार और दोनों सजदों में सज्दे की तस्बीह के बाद 10–10 बार और दोनों सजदों के दर्मियान बैठने की हालत में

यानी जैसे में 10 बार वही कलमाते तस्बीह पढ़े, इस तरह हर रकअत में 75 मर्तबा और 4 रकअत में 300 मर्तबा ये कलमात तस्बीह हो जाएगी,

और अगर इन कलमात के बाद”

وَلا حَوْلَ وَلاَ قُوَّة ِ الَّا بِاللّهِ الْعَلِىّ الْعَظِيْم

व ला हवला व ला क़ुव्वते इल्ला बी-ललही-ल-अलियई-ल-अज़ीम“ भी मिला ले तो बेहतर है क्यूंकि इससे बहुत सवाब मिलता है और एक रिवायत में इन अल्फ़ाज़ की ज़्यादती मन्क़ूल है,

दूसरा तरीक़ा,

दूसरा तरीक़ा जो हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु से तिर्मिज़ी शरीफ और अबू दावूद शरीफ में मन्क़ूल है,

वो ये हौं के” सना “के बाद और अल्हम्दु शरीफ से पहले किसी रकअत में इन कलमाते तस्बीह को न पढ़े बल्कि हर रकअत में अल्हम्द और सूरत पढ़ने के बाद 15 मर्तबा पढ़े,

और रुकू और कोमा और दोनों सज्दों और जलसा में बा तरतीब 10-10 मर्तबा पढ़े और दुसरे सज्दे के बाद बैठ कर यानी जलसा इसतरहट (यानी दूसरी रकअत के लिए खड़े होने से पहले ही बैठे बैठे) 10 मर्तबा पढ़े,

इस तरह हर रकअत में 75 मर्तबा पढ़े और दोनों कादो में” अत्तहिय्यत ” से पहले पढ़ ले,

सालतुत तस्बीह में कोई भी सूरत पढ़ी जा सकती है, अलबत्ता अलाल तरतीब” तकसुर ,असर, काफ़िरून और इखलास ” और कभी ” इजाजुल ,आदियात ,इज़ाफा और इखलास ” का पढ़ना बेहतर है,

फ़ज़ाइल-ए-ज़िक्र

शबे बरात 1 मे मंगल के दिन होगी.

पहले पढ़ो फिर अमल करो और हो सके तो शेयर भी करो

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