सहरी और इफ़्तार की पहचान होने के साथ-साथ अहम रुकुन भी है इनकी बहुत फ़ज़ीलत बयान की गई हैं, जानिए

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iftar ki dua
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sehri aur iftar ki pahchan hone ke sath-sath aham rukun bhi hai

सहरी और इफ़्तार

सहरी और इफ़्तार की पहचान होने के साथ-साथ अहम रुकुन भी है इनकी बहुत फ़ज़ीलत बयान की गई हैं।

सहरी और इफ़्तार की फ़ज़ीलत में कुछ अहादीस-ए-नबवी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) इस तरह हैं

सहरी खाओ की सहरी खाने में बरकत है।

(मुस्लिम व अबू दाऊद व तिर्मिज़ी व निसाई व इब्ने माज़ा, अनस रज़ि० से रिवायत)

हमारे और अहले किताब के रोज़ों में फ़र्क़ सहरी का लुक़मा है।

(मुस्लिम व अबू दाऊद व तिर्मिज़ी व निसाई व इब्ने खुजैमा, अम्र रज़ि, से रिवायत)

तीन चीज़ों में बरकत है जमाअत में, सरिद (एक खाना) और सहरी में।

(तबरानी ने कबीरा में सलमान फ़ारसी रज़ि० से रिवायत)

अल्लाह और उसके फ़रिश्ते सहरी खाने वालों पर दुरुद भेजते हैं।

(तबरानी औसत में और इब्ने हिब्बान सही में इब्ने उम्र रज़ि० से रिवायत)

हमेशा लोग खैर के साथ रहेंगे जब तक इफ़्तार में जल्दी करेंगे।

(बुखारी व मुस्लिम व तिर्मिज़ी, सहल इब्ने सअद रज़ि० से रिवायत)

उम्मत मेरी सुन्नत पर रहेगी जब तक इफ़्तार में सितारों का इन्तिज़ार न करो।

(इब्ने हिब्बान सहीह में उन्ही से रिवायत)

जब तुम में कोई रोज़ा इफ़्तार करे तो खजूर या छुआरे से इफ़्तार करे की वह बरकत है और अगर न मिले तो पानी से की वह पाक करने वाला है।

(इमाम अहमद व अबू दाऊद और तिर्मिज़ी व इब्ने माज़ा व दारमी सलमान इब्ने आमिर ज़बी रज़ि. से रिवायत)

हज़रत अनस रज़ि० से रिवायत है कि हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) नमाज़ से पहले तर खजूरों से रोज़ा इफ़्तार फरमाते तर खजूरें न होतीं तो चन्द खुश्क खजूरों से और यह भी न होतीं तो चन्द चुल्लू पानी पीते।

(अबू दाऊद व तिर्मिज़ी)

हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम इफ्तार के वक्त यह दुआ पढ़ते।

 

(अबू दाऊद)

जो रोज़ादार का रोज़ा इफ़्तार कराये या गाज़ी का सामान कर दे तो उसे भी उतना ही मिलेगा।

(निसाई व इब्ने खुज़ैमा, ज़ैद इब्ने खालिद जुहनी रज़ि० से रिवायत)

जिसने हलाल खाने या पानी से रोज़ा इफ़्तार कराया फ़रिश्ते रमज़ान के महीने के वक़्तों में उसके लिये इस्तिग़फ़ार करते हैं

और जिब्राईल रज़ि० शबे क़द्र में उसके लिए इस्तिग़फ़ार करते हैं।

(ताबरानी कबीरा में सलमान फ़ारसी रजि० से रिवायत)

एक रिवायत में है जो हलाल कमाई से रमज़ान में रोज़ा इफ़्तार कराएगा रमज़ान कि तमाम रातों में फ़रिश्ते उस पर दरूद भेजते हैं

और शबे क़द्र में जिब्राईल रजि० उससे मुसाफा करते हैं और एक रिवायत में है जो रोज़ादार को पानी पिलायेगा कि जन्नत में दाखिल होने तक प्यासा न होगा।

 

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