सवालात ए रमजान

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Sawal E Ramzan
Ramzan-Mubarak
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Sawal E Ramzan

सवालात ए रमजान

रमजान शरीफ के रोज़े हर आक़िल बालिग मुस्लमान पैर फ़र्ज़ है

और बगैर किसी सहारा’ उज़्र के रोज़ा न रखना हराम है,

अगर न-बालिग लड़का लड़की रोज़ा रखने की ताक़त रखते हो तो माँ-बाप पैर ज़रूरी है

क उनको भी रोज़ा रखवाए,

जो बीमार रोज़ा रखने की ताक़त रखता हो

और रोज़ा रखने से उसकी बिमारी बढ़ने का अंदेशा न हो उस पैर भी रोज़ा रखना लाज़िम है,

बाज़ लोग बगैर उज़्र के रोज़ा नहीं रखते और बिमारी या सफर की वजह से रोज़ा छोर देते है

और बाद में क़ज़ा भी नहीं रखते, खासतौर पैर औरतो न के जो रोज़े अय्याम ( माहवारी ) की वजह से रह जाते है,

उनकी क़ज़ा रखने में सुस्ती की जाती है, ये बहुत बड़ा गुनाह है,

काम की वजह से इम्तेहान की वजा से रोज़ा छोर देने की इजाज़त नहीं,

किसी दुसरे से अपना रोज़ा रखवाना जाइज़ नहीं,

जिस तरह खाना खाने से दुसरे का पेट नहीं भरता,

इसी तरह एक शख्श के नमाज़ पड़ने और रोज़ा रखने से दुसरे के ज़िम्मे का फ़र्ज़ अदा नहीं होता,

आपके मास्किल और उनका हल,3/273

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