दूसरी मस्जिद में तरावीह के लिए जाना कैसा है

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Dusari masjid mein tarawih ke liye jana kaisa hai
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Dusari masjid mein tarawih ke liye jana kaisa hai

तरावीह के फ़ज़ाइल मसाइल

दूसरी मस्जिद में तरावीह के लिए जाना?

अगर अपने मोहल्ले की मस्जिद में क़ुरआन मजीद मुक़म्मल न होता हो, या इमाम क़ुरआन मजीद गलत पढता हो तो तरावीह के लिए मोहल्ले की मस्जिद को छोड़ कर दूसरी मस्जिद में जाना जाइज़ है,

आपके मसाइल और उनका हाल, 3.

इमामत

तरावीह की इमामत के लिए वही शरायत है जो आम नमाज़ो की इमामत के लिए है,

इसलिए हाफिज का मुत्तबा ए सुन्नत होना ज़रूरी है,

दाड़ी मुंडाने या कतरने वाले को तरावीह में इमाम न बनाया जाये,

मुआवजा या उजरत

मुआवजा लेकर तरावीह पढ़ने वाले के पीछे तरावीह जाइज़ नहीं, ऐसे हाफिज के पीछे तरावीह पढ़ना मकरूहे तहरीमी है,

अगर मुख्लिस हाफिज न मिले तो “आलम तारा ” के साथ पढ़ लेना बेहतर है,

जिस इलाके में हाफिजों को उजरत देने का रिवाज हो वह हड़िया भी उजरत ही समझा जाता है,

चुनाचे अगर कुछ न दिया जाये तो लोग उसको बुरा समझते है, इसलिए तरावीह सुनाने वाले को हदिया भी नहीं लेना चाहिए,

आपके मसाइल और उनका हाल, 3/ 60

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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