रोज़े के दौरान अगर भूल कर खा लिया, या कई (उल्टी) हो गयी…

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Roze ke dauran Agar Bhool Kar Kha Liya, Ya Kai (Ultee) Ho Gayi
Roze ke dauran Agar Bhool Kar Kha Liya, Ya Kai (Ultee) Ho Gayi
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Roze ke dauran Agar Bhool Kar Kha Liya, Ya Kai (Ultee) Ho Gayi

रोज़े के दौरान अगर भूल कर खा लिया, या कई (उल्टी) हो गयी…

सवालात ए रमजान

अगर भूल कर खा लिया, या कई (उल्टी) हो गयी और ये समझ लिया के मेरा रोज़ा टूट गया और खा पीले,

तो रोज़ा टूट गया और क़ज़ा वाजिब है,

लेकिन ये मसला मालूम था के कई (उल्टी) से रोज़ा नहीं टूटता,

या भूल से खा पी लेने से रोज़ा नहीं टूटता,

इसके बावजूद कुछ खा पी ले तो इस सूरत में उसके ज़िम्मे कफ़्फ़ारा और क़ज़ा दोनों लाज़िम होंगे,

कफ़्फ़ारा जिस ने रमजान का अदा रोज़ा जानबूझ बिला शरई उज़्र यानी बगैर किसी बीमारी मजबूरी के तोड़ दिया तो उस का कफ़्फ़ारा ये है के वह लगातार 2 महीने के रोज़े रखे.

अगर उस की ताक़त न हो तो 60 फ़क़ीरों दो वक़्त पेट भर कर खाना खिलाये इस तौर पर के दोनों वक़्त वही फ़क़ीर हो
या 60 फ़क़ीरों में से हर एक को पोन दो किलो गेहूं या उस की क़ीमत या पोन दो किलो गेहूं जितनी क़ीमत में आते है उतने रूपये के चावल, जवार बाजरा वगैरा यह भी दे सकते है

(फतवा रहीमियाह 7/271)

अगर खून हलक़ में चला गया तो रोज़ा टूट जाता है,

रोज़ा की हालत में गरगरा करना और नाक में जोर से पानी चढ़ाना ममनूअ (मना) है (क्यों की कभी कभी पानी हलक़ में पहुँच जाने का डर है),

रोज़ा की हालत में(बीड़ी) सिगरेट या हुक्का पीने से रोज़ा टूट जाता है,

सेहरी खत्म होने से पहले कोई चीज़ मुँह में रख कर सो गया,तो रोज़ा नहीं हुआ,

(चाहे जब जाएगा तो सेहरी का टाइम निकल चूका था, फिर मुँह की चीज़ निकाल कर फेक दी और कुल्ली कर ली हो जैसे तम्बाकू वगैरह)

दांतो में गोश्त का रेशा या कोई चीज़ रह गयी थी,

और खुद बा खुद अंदर चली गयी, तो अगर चने के दाने के बराबर या उससे ज़्यादा थी तो रोज़ा जाता रहा,

और अगर चने के दाने से कम थी तो रोज़ा नहीं टूटा (लेकिन बिहार है के उसको खुद निकाले जब ऐसा महसूस हो)

अगर बहार से कोई चीज़ डालकर निगल ली तो चाहे थोड़ी हो या ज़्यादा उससे रोज़ा टूट जाता हो,

किसी औरत को सिर्फ देखने से इन्जाल हो जाये (मानी निकल जाये) तो रोज़ा नहीं टूटता,

लेकिन गले लगाने से, बोसा लेने से इन्जाल हो तो रोज़ा टूट जाता है, सिर्फ क़ज़ा वाजिब होगी,

रोज़े की हालत में अगर कोई शख्स हाथ के ज़रिये से मानी निकाल दे तो रोज़ा टूट जाता है, सिर्फ क़ज़ा लाज़िम है,

(आपके मास्किल और उनका हल, 3/241)

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