ज़िबह के वक़्त नियत न की तो उसकी क़ुरबानी हुई या नहीं?

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Zibah ke waqt niyat na ki to uski qurbani hui ya nahi?
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Zibah ke waqt niyat na ki to uski qurbani hui ya nahi?

ज़िबह के वक़्त नियत न की तो उसकी क़ुरबानी हुई या नहीं?

किसी ने क़ुरबानी के लिए कोई जानवर खरीदा लेकिन जिस वक़्त ज़िबह किया जा रहा था उस वक़्त कोई नियत न की तो उसकी क़ुरबानी हुई या नहीं?

खरीदते वक़्त नियत काफ़ी है ज़िबह के वक़्त नियत ज़रूरी नहीं है

(किताबुल मसाइल)

कोई मालदार तो है लेकिन उसके पास नकदी (Cash) नहीं है सोना चांदी ज़मीन है तो वो क्या करे क़ुरबानी करे या नहीं?

अगर इतना माल हो के क़ुरबानी वाजिब हो गयी हो तो या तो क़र्ज़ ले के करे,

या फिर अपना सामान बेच कर करे

(किताबुल फतवा)

नोट– लोग अपनी दुनिया की ज़रुरत के लिए क़र्ज़ ले सकते हैं तो अल्लाह के लिए क्यों नहीं

और दुनिया के लिए अपना सामान बेच सकते हैं तो दीन के लिए क्यों नहीं

क़ुरबानी का गोश्त गैर मुस्लिम को दे सकते है क्या?

क़ुरबानी का गोश्त गैर मुस्लिम को दे सकते है,

(अहसानुल फतवा)


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