उमरा का मुक़म्मल तरीक़ा क्या है?

5
305
Tawaf Ya Sa'Ee Ke Chakkaro Me Shak Ho Jaye To Kya Kare?
umra
Islamic Palace App

umra ka muqammal tareeqa kya hai? 

उमरा का मुक़म्मल तरीक़ा क्या है?

उमरा का बहुत आसान तरीक़ा बता रहा हूँ, आप भी पढ़े हज पर जाने वाले हज़रात को भी बताइये

सफ़र का आग़ाज़

घर से रवानगी के वक़्त 2 रकअत पढ़ कर अल्लाह ताआला से क़ुबूलियत की दुआए करे,

ज़रूरत का तमाम सामान, पास पोर्ट, टिकट, अहराम की चादर, खर्च की रक़म वग़ैरा,

फ़र्ज़ नमाज़ कसर पढ़े,

सफ़र 48 मील (77 Km तक़रीबन) हो तो कसर पढ़ते हे,

ज़ुहर, असर, ईशा 4 की बजाये 2 पढ़े,

फ़ज़र, मग़रिब, वित्र पूरी पढ़े,

सुन्नते अगर इत्मीनान का वक़्त हे तो पढ़ले, न पड़े तो कोई गुनाह नहीं,

लेकिन फ़ज़र की 2 रकअत सुन्नत को ज़रूर पढ़े,

उमरा के अरकान

1- मीक़ात से उमरा का अहराम बांधना,

2- मस्जिद-ए-हराम पहुँच कर बैतुल्लाह का तवाफ़ करना

3- साफा मरवा की साअल करना,

4- सर के बाल मुंड़वाना या कटवाना,

अहराम बांधना

सुन्नत के मुताबिक़ ग़ुस्ल करके अहराम बांधले,

2 रकअत निफल अदा करे,

उमरा की नियत करले,

3 मर्तबा तलबिया पढ़ले,

लब्बेक अल्लाहुम्मा लब्बेक, लब्बेक ला शारिका लका लब्बेक
इन्नल हमदा वल नियमता लका वालमुल्का, ला शारिका लका,

मस्जिद-ए-हराम पहुँचने तक यही तलबिया पढ़ते रहना हे,

अहराम के मसाइल

ग़ुस्ल से फ़ारिग़ होकर अहराम बाँधने से पहले खुशबु लगाना सुन्नत हे,

औरतो के लिए अहराम का कोई ख़ास लिबास नहीं हे आम लिबास पहन ले,

चेहरे से कपड़ा हटा ले, फ़िर नियत करके आहिस्ता से तलबिया पढ़ले,

औरते बालो की हिफाज़त के लिए अगर सर पर रुमाल बाँध ले तो कोई हर्ज नहीं,

वज़ू के वक़्त इसको खोलकर सर पर मसह ज़रूरी हे,

अगर कोई औरत ऐसे वक़्त में मक्का मुकर्रमा पहुंची के माहवारी आ रही हो तो वो पाक होने तक इंतज़ार करे,

पाक होने के बाद ही उमरह करने के लिए मस्जिद-ए-हराम में जाये,

उमरा की अदायगी तक उसको अहराम में ही रहना होगा,

अगर आप पहले मदीना मुनव्वरा जा रहे हैं तो मदीना मुनव्वरा जाने के लिए किसी अहराम की ज़रूरत नहीं है

लेकिन जब आप मदीना मुनव्वरा से मक्का मुकर्रमा जाये तो फ़िर मदीना की मीक़ात पर अहराम बांधे,

अहराम की हालत में अगर अहतलाम हो जाये तो इससे अहराम में कोई फ़र्क़ नहीं पढ़ता,

कपड़ा जिस्म धोकर ग़ुस्ल कर ले, अगर अहराम की चादर बदलने की ज़रूरत हो तो दूसरी चादर इस्तेमाल कर ले,

लेकिन मिया बीवी वाले ख़ास ताल्लुक़ात से बिलकुल दूर रहे,

एक अहम् हिदायत

मीक़ात पर पहुँच कर या इससे पहले अहराम बांधना ज़रूरी है,

लेकिन अगर आप हवाई जहाज़ से जा रहे हैं और आपको जद्दह में उतरना है तो हवाई जहाज़ में सवार होने से पहले ही अहराम बांधले

या हवाई जहाज़ में मीक़ात से पहले पहले बांधले, और अगर मौक़ा हो तो 2 रकअत भी अदा कर ले,

फ़िर नियत करके तलबिया पढ़ले,

अहराम बांधले के बाद नियत करने और तलबिया पढ़ने में ताख़ीर की जा सकती है,

यानि आप अहराम हवाई जहाज़ में सवार होने से पहले बांधले और नियत मीक़ात आने से पहले करके तलबिया पढ़ ले,

याद रहे के नियत और तलबिया के बाद ही अहराम की पाबन्दी शुरू होती है,

तम्बीह,

अगर मीक़ात से बहार रहने वाला (जिसको आफ़ाक़ी कहते है) बगैर अहराम मीक़ात से गुज़र गया

तो आगे जाकर किसी भी जगह अहराम बांधले लेकिन उस पर एक दम लाज़िम हो गया,

मसलन रियाद का रहने वाला बगैर अहराम के जद्दा पहुँच गया तो जद्दा या मक्का मुकर्रमा से अहराम बाँधने पर एक दम देना होगा,

मामूआत अहराम

अहराम बांध कर तलबिया पढ़ लेने के बाद ये चीज़े हराम है:
खुशबु लगाना,

नाख़ून काटना

जिस्म से बाल दूर करना

चेहरे का ढांकना,

मिया बीवी वाले ख़ास ताल्लुक़ात, जिन्सी सोहबत के काम करना,

खुश्की के जानवरो का शिकार करना,

सिर्फ़ मर्दो के लिए ममनू,

सिले हुए कपड़े पहनना

सर को टोपी या कपडे से ढांकना,

ऐसा जूता पहनना जिससे पाँव की दरम्यानी हड्डी छुप जाये,

मकरूहाते अहराम

बदन से मेल दूर करना,

साबुन का इस्तेमाल करना

कंघा करना

अहराम की हालत में जालज उमूर

ग़ुस्ल करना लेकिन खुशबूदार साबुन का इस्तेमाल न करे

अहराम को धोना या बदलना

अंगूठी, घडी, चश्मा, बेल्ट, छतरी वग़ैरा का इस्तेमाल करना

अहराम के ऊपर मज़ीद चादर दाल कर सोना, लेकिन मर्द अपने सर और चेहरे को और औरते अपने चेहरे को खुला रखे,

मस्जिद-ए-हराम की हाज़री

मक्का मुकर्रमा पहुँच कर सामान वग़ैरा अपनी क़यामगाह में रखकर आराम की ज़रूरत हो तो थोड़ा आराम करले

वरना ग़ुस्ल या वज़ू करके उमरा करने मस्जिद-ए-हराम की तरफ सुकून, इत्मीनान के साथ तलबिया पढ़ते हुए जाये,

दरबारे इलाही की अज़मत व् जलाल का लिहाज़ रखते हुए दाया क़दम अंदर रख कर मस्जिद में दाखिल होने की दुआ पढ़ते हुए दाखिल हो जाये,

काबा शरीफ पर पहली नज़र

जिस वक़्त खाना काबा पर पहली नज़र पढ़े तो अल्लाह तआला की बढ़ाई बयान करके जो चाहे अपनी ज़ुबान में अल्लाह तअला से मांगे,

क्योंकी ये दुआ क़ुबूल होने का ख़ास वक़्त है।

तवाफ़

मस्जिद-ए-हराम में दाखिल होकर काबा शरीफ के उस हिस्से में आ जाये जहा हज्रे अस्वद लगा हुआ है

और तवाफ़ की नियत कर ले|


Read More

अगर कोई ज़िबह करते वक़्त बिस्मिल्लाह तो पढ़े बाक़ी दुआ न पढ़े तो?

ज़िबह के वक़्त नियत न की तो उसकी क़ुरबानी हुई या नहीं?


Follow Us

हमारा फेसबुक पेज लाइक करने के लिए यहाँ क्लिक करें…

अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

ISLAMIC PALACE को लाइक करने के लिए आप सभी का बहुत-बहुत शुक्रिया। जिन्होंने लाइक नहीं किया तो वह इसी तरह की दीन और इस्लाम से जुड़ी हर अहम बातों से रूबरू होने के लिए हमारे इस पेज Islamic Palace को ज़रूर लाइक करें, और ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को शेयर के ज़रिये पहुंचाए। शुक्रिया


For More Msgs Click This Link
www.islamicpalace.in

बराये करम इस पैग़ाम को शेयर कीजिये अल्लाह आपको इसका अजर-ए-अज़ीम ज़रूर देगा
आमीन

►जज़ाकअल्लाह खैरन◄

PLEASE SHARE

5 COMMENTS

  1. Once I originally commented I clicked the -Notify me when new feedback are added- checkbox and now every time a remark is added I get 4 emails with the identical comment. Is there any way you’ll be able to take away me from that service? Thanks!

LEAVE A REPLY

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.