ज़िन्दगी गुज़ारने के दो रास्ते जानिए

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Gentlemen Elders and Friends Two Paths to Live Life
Islam
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Gentlemen Elders and Friends Two Paths to Live Life

Gentlemen Elders and Friends Two Paths to Live Life :

There are two ways to live in the world.

One way is straight and the other way is crooked.

The direct path leads to Allah’s will.

Those who walk on the path are tested in the world,

the tests come and the help of Allah Pak also comes.

At the same time,

the person who goes on straight path leads to a lot of increase in spirituality.

It keeps on growing inwardly. The other does not appear.

Even those who are going to walk on a crooked path,

they do not even see them. Rather, they understand that it is just too.

The one who walks on a crooked path goes on the path of God’s wrath,

and the man goes away from God. Generally, the life of a crooked person is free.

Whatever the wish, the mind wants, the arbitrary, the world-level and the self-made person.

(Dawat and Tabligh, Safa no 150)

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ज़िन्दगी गुज़ारने के दो रास्ते

मोहतरम बुजुर्गो और दोस्तो!

दुनिया के अन्दर ज़िन्दगी बसर करने के दो रास्ते हैं।

एक रास्ता तो है सीधा और दूसरा रास्ता टेढ़ा है।

सीधा रास्ता अल्लाह कि रज़ामन्दी को पहुंचाता है।

सीधे रास्ते पर चलने वाले पर दुनिया के अन्दर इम्तिहान पेश आते हैं,

आज़माईशें पेश आतीं हैं और अल्लाह पाक कि मदद भी आती है।

साथ ही सीधे रास्ते पर चलने वाले के अन्दर रूहानी ताक़त बहुत ज़्यादा बढ़ जाती है।

यह अन्दर ही अन्दर बढ़ती रहती है। दूसरे को दिखाई नहीं देती।

यहां तक कि जो टेढ़े रास्ते पर चलने वाले हैं, उन्हें भी वह दिखाई नहीं देती।

बल्कि वे यह समझते हैं कि वह भी यूँ ही है।

और टेढ़े रास्ते पर जो चलना है वह खुदा की नाराज़गी वाले रास्ते पर चलता है और वह आदमी खुदा से दूर होता जाता है।

आम तौर से टेढ़े वाले रास्ते पर चलने वाले की ज़िन्दगी आज़ाद होती है।

जी चाहे, मन चाही, मनमानी, दुनिया-तलबी और खुदगर्जी वाली होती है।

(दावत व तब्लीग, सफा न० 150)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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