9 और 10 मोहर्रम का रोजा – पोस्ट 1

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9 Aur 10 muharram ka roza
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9 Aur 10 muharram ka roza – post 1

शहादत ए हुसैन रज़ीअल्लाहू अन्हू

9 और 10 मोहर्रम का रोजा – पोस्ट 1


सही बुखारी मे हजरत इब्ने अब्बास रजिअल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है

के जनाबे रसुल्लाह (सल्ललाहु अलैही व सल्लम) मदिना तैय्यबा मे तशरिफ लाये तो यहुदो को देखा के वो इस दिनो को रोजा रखा करते है,

हुजुरे अकरम (सल्ललाहु अलैही व सल्लम) ने फरमाया,”तुम रोजा क्यो रखते हो?

“कहेने लगे,

ये बहोत अच्छा दिन है, इस दिन मे हक तआला ने बनी इस्राइल को ऊनके दुश्मन फिरौन से निजात दि थी,

इसलिये हजरत मुसा अलैहुसलाम ने इस दिन रोजा रखा,

ये सुनकर हुजूर अकरम (सल्ललाहु अलैहु व सल्लम) ने इर्शाद फरमाया,

के हम बनीइसब्बत तुम्हारे हजरत मुसा अलैसलाम की मुवाफीकत के ज्यादा हकदार है’

फिर हुजूर अकरम (सल्ललाहु अलैहि व सल्लम) ने खुद भी रोजा रखा

और सहाबा इकराम रजिअल्लाहु तआला अन्हु को भी इस दिन रोजा का हुक्म दिया,

सही मुस्लीम मे हजरत अबु हुरैरा रजिअल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है

के रमजान के बाद अफजल रोजा मोहर्रम का है,

और फर्ज नमाज के बाद अफजल नमाज तहाज्जुत की नमाज है,

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हुजुरे अक्दस (सल्ललाहु अलैहि व सल्लम) की हयात तैय्यबा में जब भी आशुरा का दिन आता

तो हुजूरे अकरम (सल्ललाहु अलैहि व सल्लम) रोजा रखते लेकीन वफात से पहेले जो आशुरा का दिन आया तो

हुज़ूरे अकरम (सल्ललाहु अलैहि व सल्लम) ने आशुरा का रोजा रखा

और साथ ही ये भी इर्शाद फरमाया के 10 मोहर्रम को हम भी रोजा रखते है

और यहुद भी रोजा रखते है, जिसकी वजह से उनके साथ हल्की मुसिबत पैदा हो जाती है,

इसलिये अगर मै आइंदा साल जिंदा रहा तो सिर्फ तो आशुरा का रोजा नही रखुंगा,

बल्की उसके साथ एक रोजा और मिलाऊंगा,


9 मोहर्रम का रोजा भी रखुगा ताकी यहुदो के साथ मुसीबत खत्म हो जाये।

लेकीन अगले साल आशुरे का दिन आने से पहेले हुज़ूरे अकरम (सल्ललाहु अलैहि व सल्ल्म) का विसाल हो गया

और हुजुरे अकरम (सल्ललाहू अलैहि व सल्लम) को इस पर अमल का मौका नही मिला,

लेकीन क्यूंकि हुजूर अकरम (सल्ललाहू अलैहि व सल्लम) ने ये बात इर्शाद फरमा दि थी

इसलिये सहाबा इकराम रजिअल्लाहू अन्हू तआला ने आशुरा का रोजे मे इस बात का अहेतमाम किया,

और 9 या 11 मोहर्रम का एक रोजा और मिला कर रखा,

और इसको मुस्तहब करार दिया और तन्हा आशुरा का रोजा रखने को हुजूर अकरम (सल्लाहु अलैहि व सल्लम) का इर्शाद की रोशनी मे मकरूह तन्जीही और खिलाफे औला करार दिया।

(शहादत ए हुसैन रज़ीअल्लाहू अन्हू)


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