क्या रजब या किसी महीने की खुश खबरी देने से जन्नत मिलेगी? पोस्ट-1

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KYA RAJAB YA KISI MAHINE KI KHUSH KHABRI DENE SE JANNAT MILEGI
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KYA RAJAB YA KISI MAHINE KI KHUSH KHABRI DENE SE JANNAT MILEGI? 

माहे रज्जब की गलत फहमियां

खुश खबरी देना


क्या रजब या किसी महीने की खुश खबरी देने से जन्नत मिलेगी? पोस्ट-1

आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया:

जो मुझ पर जान बूझ कर झूठ बांधें उसका ठिकाना जहन्नम है

बुखारी जिल्द 3.

आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने इरशाद फ़रमाया :

आदमी के झूठा होने के लिए यही काफी है के वो हर सुनी सुनाई बात को बयान करता फिरे

मुस्लिम-8.

रजब या किसी और महीने की मुबारकबाद देने से जन्नत मिलना किसी हदीस से साबित नहीं है,

आज कल मैसेज/व्हाट्सअप /फेसबुक के ज़रिए ऐसी झूटी बातें रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की तरफ

निस्बत कर के आम की जराही है बार हम जानते हुए या अनजाने में उन्हें फॉरवर्ड कर के या शेयर कर के इस झूट में

शामिल होरहे हैं और अपना ठिकाना जहन्नम में बना रहे हैं


याद रखये।

इस पूरे महीने के बारे में जो बात सहीह सनद से हुज़ूर अक़दस (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से साबित है,

वो ये है के जब आप रजब का चाँद देख कर आप ये दुआ फ़रमाया करते थे के

اللهم بارك لنا في رجب و شعبان و بلغنا رمضان

“ए अल्लाह! हमारे लिए रजब और शाबान के महीने में बरकत अता फरमाइये और हमें रमज़ान तक पोहंचायये.


बइहाकि शोबुल ईमान 3534.

यानि हमारी उम्र इतनी कर दिज्ये के हम अपनी ज़िन्दगी में रमज़ान को पालें,

गोया के पहले से रमज़ानुल मुबारक की आमद का इश्तियाक़ होता था.

ये दुआ आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से सहीह सनद के साथ साबित है,

इस लिए ये दुआ करना सुन्नत है और अगर किसी ने रजब में ये दुआ न की हो तो वो अब ये दुआ करले

इसके इलावा और चीज़े जो आम लोगों में मशहूर होगया हैं,उन की शरीअत में कोई असल और बुन्याद नहीं


नोट-अगर आप को भी ऐसा मैसेज आया या अपने फॉरवर्ड या शेयर किया हो तो

इस पोस्ट को दूसरो तक पोहंचा कर इस ग़लत बात का रद करें और ग़लत बात पोहचाने की तौबा करलें

और जिन जिन तक पोहचाया था उन को उस बात के ग़लत होने की इत्तेला देदें

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