जुमा मुबारक कहना कैसा है?

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Jumaa Mubarak Kehna Kaisa Hai
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Jumaa Mubarak Kehna Kaisa Hai?

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

दीनी-मसाइल

सवाल

जुमा मुबारक कहना कैसा है?

{1}मुस्तहब?
{2}सुन्नत?
{3}बिदअत?
{4}सुन्नत या दीन समझ कर न कहा जाये तो मुबाह यानी जाइज़ है?
{5}बचना बेहतर?

जवाब

जुमा का दिन बा बरकत है उस बरकत के इज़हार के लिए या बतौर दुआ मुसलमानो का बहम एक दूसरे को जुमा मुबारक कहना या इस (का मैसेज भेजना) फी नफ़सीही- बज़ाहिर जाइज़ तो है,
मगर मुस्तक़िल- खास तौर पर जुमा के दिन का शरी जुज़्व-हिस्सा और रस्म बना लेने की गलती न हो जाये (आज तो व्हाट्सप्प पर बाज़ लोगों ने रसम बना ली है) इसलिए बाज़ अहले इल्म ने मन किया है.
फ़क़त अल्लाहु आलम

(दारुल इफ्ता जामिआ उलूमि इस्लामियाह बिन्नोरी तआवुन करांची का फतवा तशील-अल्फ़ाज़ को आसान करने के साथ)

उसूल (1)

किसी काम के बारे में सुन्नत और बिदअत होने में शक हो तो उसे भी छोड़ देना बेहतर है तो जिस काम के बारे में बिदअत और मुबाह-जाइज़ होने में शक हो और रस्म बन जाने का खतरा हो उस को तो बा तरीके आँवला छोड़ देना चाहिए.

उसूल (2)

बल्कि जिस काम में नफा हो लेकिन नुकसान का भी खतरा हो तो शरीअत ने नफा हासिल करने के मुक़ाबले में नुक़सानसे से बचने को बेहतर कहा है।

(रस्मुल मुफ़्ती)

ये दो उसूल इख़्तियार कर लिए जाये तो तमाम ऐसे काम जिस के बिदअत और जाइज़ होने में इख्तिलाफ है उम्मत को उन शक वाले कामो से नजात मिल जाये

बाज़ ममालिक में जुमा का दिन पता नहीं चलता तो उस की यद् दिलाने के लिए जुमा मुबारक कहते है उन को भी चाहिए के याद दिलाने के लिए जुमा मुबारक कहने के बजाये जुमा की किसी सुन्नत की दावत दी जाये तो ये मक़सद भी हासिल हो जायेगा।

मसलन आज जुमा है मस्जिद जल्द पहुंचने की सुन्नत हम अदा करे, वगैरह.

(माखूज़ अज़ फतवा रहीमियाह 2/187)

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