इस्लाम में हज की अहमियत

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Islam Me Hajj Ki Ahmiyat
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हज के फ़ज़ाइल

इस्लाम में हज की अहमियत

हज भी नमाज़ रोज़ा और ज़कात की तरह इस्लाम का एक एहम फ़र्ज़ है, नमाज़ और रोज़ा जिस्मानी इबादत है ज़कात माली इबादत है.

और हज जिस्मानी और माली इबादत का मजमुआ है साहिब-ऐ-इस्तितात आक़िल बालिग़ मुस्लमान मर्द व औरत पर उम्र भर में एक बार हज करना फ़र्ज़ है.

जिस तरह हर मुस्लमान पर नमाज़ रोज़ो के मसाइल और मालिक-ऐ-निसाब पर ज़कात के मसाइल सीखना वाजिब है उसी तरह जब कोई मुस्लमान हज का इरादा करे तो उसपर हज के मसाइल सीखना ज़रूरी है टेक हज सही तौर पर अदा हो और सफर की म्हणत मशक्कत और पैसा बेकार ना जाये।

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