हज़रत युसूफ (अलैहिस्सलाम) की अपने वालिद से जुदाई

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Hazrat Yusuf (Alaihissalam) Ki Apne Walid Se Judayi
HIQAYAT Yusuf (Alaihissalam)
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Hazrat Yusuf (Alaihissalam) Ki Apne Walid Se Judayi

हज़रत युसूफ (अलैहिस्सलाम) की अपने वालिद से जुदाई

हिकायत: युसूफ (अलैहिस्सलाम)

अज़ीज़ दोस्तों , हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) जो की फलीस्तीन में रहते थे. उनके 12 लड़के थे . उन ही में से पहली बीवी से युसूफ (अलैहिस्सलाम) और बिन यामीन थे. और दूसरी बीवी से 10 लड़के थे.

युसूफ (अलैहिस्सलाम) बहुत खूबसूरत और हसीन जमील थे. उनकी खूबसूरती की मसाले आज भी दी जाती है. हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) युसूफ (अलैहिस्सलाम) से बहुत मोहब्बत करते थे, और ये ही बात उनके बाक़ी 10 भाइयो को खटकती थी नागवार लगती थी.

हज़रत युसूफ (अलैहिस्सलाम) की अपने वालिद से जुदाई:
एक दिन युसूफ (अलैहिस्सलाम) ने एक खवाब देखा और अपने अब्बा जान से कहा की मैंने खुआब में देखा है 11 सितारे, चाँद और सूरज सब मुझे सजदा कर रहे है हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) इस खुआब की ता-बीर समझ गए की अल्लाह तआला युसूफ (अलैहिस्सलाम) को नबूवत से सरफ़राज़ फरमाएगा और दीं की खिदमत लेगा.

क्योंकि उन्हें अपने बाक़ी 10 बेटो के बारे में मालूम था. इसीलिए उन्होंने युसूफ (अलैहिस्सलाम) को नसीहत फ़रमाई की इस खवाब का ज़िक्र किसी से मत करना, क्योंकि शैतान इंसानो का खुला दुश्मन है.

एक दीं 10 भाइयो ने मशवरा किया की अब्बा जान युसूफ (अलैहिस्सलाम) को जियादा चाहते है. और हम लोगो को नहीं चाहते. जब की हम लोग तादाद में भी जियादा है और क़ूवत में भी.

एक भाई ने मशवरा दिया क्यों न युसूफ को क़तल कर दिया जाए . जब वो ही न रहेंगे तोह अब्बा जान हम से भी मोहब्बत करेंगे और हम लोग बाद में सीधे और सच्चे बन जायेगे. इस पर दूसरे ने कहा, “नहीं हम उनका क़तल नहीं करेंगे बल्कि उनको एक अंधे कुवे (वेल) में दाल देंगे और हो सकता है की कोई काफिला आये और युसूफ को अपने साथ ले कर चला जाए इस बात पर सब भाइयो की एक राय बन गई”.

और वह सब मिलकर अपने अब्बा जान के पास आये और कहने लगे “क्या बात है की आप युसूफ के बारे में हम पर भरोसा नहीं करते, हालांकि हम तोह उसके खैरख्वाह है. कल आप उसे हमारे साथ भेज दो ताकि वो हमारे साथ खाये और खेले, और हम उसकी हिफाज़त करेंगे.

याक़ूब (अलैहिस्सलाम) ने कहा, “तुम अगर इसे साथ ले गए तो मुझ को इस की जुदाई का गम होगा, और मैं डरता हूँ की कही तुम लोग खेल कूद में मस्त हो जाओ और इस से गाफिल हो जाओ और कोई भेड़िया उसे खा जाए”.

इस पर उनके बेटो ने कहा, “हम लोग एक ताक़तवर जमात है, अगर हमारे होते हुवे कोई भेड़िया युसूफ को खा जाए तोह ये बात हमारे लिए नुकसानदायक होगी”.

इस तरह वह अपने अब्बा जान से ज़िद कर के युसूफ (अलैहिस्सलाम) को अपने साथ ले गए. और वहा पर युसूफ (अलैहिस्सलाम) को एक अंधे कुवे (वेल) में फेक दिया.

जैसे ही उन्होंने युसूफ (अलैहिस्सलाम) को कुवे में फेका वैसे ही जिब्राईल (अलैहिस्सलाम) ने युसूफ (अलैहिस्सलाम) को लपक कर खैरियत के साथ कुवे के तहे तक पहुँचा दिया और उन् से कहा , “घबराना (डरना) नहीं अल्लाह तआला तुम्हारा निगहबान है”.

बाक़ी भाइयो ने युसूफ (अलैहिस्सलाम) की कमीज पर एक भेद (Sheep) का झूठा-मुठा रंग लगाकर रट हुवे अपने अब्बा जान के पास पहुँचे और कहा की, “हम लोग आपस में शर्त लगा कर दौड़ (Run) कर रहे थे और युसूफ (अलैहिस्सलाम) सामान के पास पीछे छूट गए और हम लोगो को ख़याल ही न रहा. और एक भेड़िये ने आकर युसूफ (अलैहिस्सलाम) को खा लिया”.

याक़ूब (अलैहिस्सलाम) ने कहा, “तुम लोग झूट बोल रहे हो, अब अल्लाह तआला ही मुझे सबर दे, और इस मामले में मे उस से ही मदद चाहता हूँ”.

फिर उस कुवे के पास एक काफिला आया. उन् में से कुछ लोग पानी लेन के लिए कुवे पर गए जैसे ही उन लोगो ने कुवे में पानी का दोल डाला, युसूफ (अलैहिस्सलाम) ने उस दोल को पकड़ लिया. और उस दोल के सहारे ऊपर आ गए उन् लोगो ने एक हसीन जमील बच्चे को देखा तो बहुत खुश हुवे और आपस में कहा की “इस की तो बाज़ार में अच्छी कीमत मिल जायेगी. और हो सकता है कोई आमिर इस को अपनी औलाद ही बनाले इस को छिपा लो के किसी को पता न चले”.

और इस तरह वह लोग युसूफ (अलैहिस्सलाम) को अपने साथ मिस्र (Egypt) के बाज़ार में ले गए और युसूफ (अलैहिस्सलाम) को बेच दिया.

जिस शख्श ने युसूफ (अलैहिस्सलाम) को खरीदा वह मिस्र (Egypt) का आमिर था, रिवायतों में है की वह बादशाह मिस्र का खजांची था. उसे अज़ीज़ मिश्र भी कहा जाता था. वह शख्श बे-औलाद था. युसूफ (अलैहिस्सलाम) को देखते ही समझ गया था की ये कोई गुलाम नहीं है . बल्कि किसी बेहद इज़्ज़तदार और मोतारम घराने का फर्द (लड़का) है. जिसे गर्दिश-ऐ-ज़माना यहाँ ले आयी है. इसीलिए उसने अपनी बीवी जिस का नाम ज़ुलेखा था. उस से कहा, “इस से इन्तेहाई इज़्ज़त और वक़ार के साथ पेश आना, मुमकिन है की हम इसे अपना बीटा ही बना ले ”.

युसूफ (अलैहिस्सलाम) तक़रीबन 3 साल अज़ीज़ मिस्र के घर रहे. युसूफ (अलैहिस्सलाम) खूबसूरत हसीं और जमील थे उस वक़्त उनकी उम्र 20 साल थी. और अज़ीज़ मिस्र की बीवी ज़ुलेखा बे -औलाद और जवान थी. वह युसूफ (अलैहिस्सलाम) के इश्क़ में गिरफ्तार हो गयी. उस वक़्त का समाज भी कुछ आज़ाद खयालात वाला था. इसी लिए ज़ुलेखा की युसूफ (अलैहिस्सलाम) को पाने की चाह सिद्दत पकड़ गयी.

ज़ुलैख़ा का फरेब और युसूफ (अलैहिस्सलाम) को क़ैद :

एक दिन जब अज़ीज़ मिस्र घर पर नहीं था. तब ज़ुलेखा की हवस जाग गयी और उसने युसूफ (अलैहिस्सलाम) को अपनी तरफ वरगालाना चाहा. उस ने दरवाज़े बंद कर दिए और कहने लगी जल्दी से आ जाओ. युसूफ (अलैहिस्सलाम) ने कहा, “अल्लाह तआला की पनाह, मेरे रब ने मुझे बहुत अच्छी मन्ज़िलत बख्शी है, ज़ालिम लोग यक़ीनन फलाह नहीं पाते”. अब ज़ुलेखा उन् से ज़बरदस्ती कर ने पर उतर आयी.

वह उनको पकड़ने के लिए उनकी तरफ दौड़ी. युसूफ (अलैहिस्सलाम) उस से बचने के लिए दरवाज़े की तरफ भागे ज़ुलेखा ने उनकी कमीज पीछे से पकड़ कर अपनी तरफ खींचना चाहा तोह कमीज पीछे से फैट गयी. जैसे ही युसूफ (अलैहिस्सलाम) ने दरवाज़ा खोला, सामने अज़ीज़ मिस्र खड़ा था. उसी वक़्त ज़ुलेखा ने चाल चली और अज़ीज़ मिस्र से कहा, “जो तेरे घर की इज़्ज़त पे हाथ डाले उसे क्या सज़ा मिलनी चाहिए? और फिर खुद ही सज़ा भी सुना दी की इसको जेल में डाल देना चाहिए…”

युसूफ (अलैहिस्सलाम) ने कहा, “मैंने कोई भी गलत काम नहीं किया है, ये ही मुझे वरगालाना चाहती थी”.

अब दोनों में से गुनाहगार कौन है ये कैसे साबित होगा , इस पर किसी ने कहा (एक रिवायत में है की एक दूध पिते बच्चे ने गवाही दी) अगर कमीज सामने से फटी हुयी हो तोह युसूफ (अलैहिस्सलाम) गुनेहगार और अगर कमीज पीछे से फटी हुयी हो तोह ज़ुलेखा गुनेहगार. इसीलिए जब अज़ीज़ मिस्र ने देखा तो कमीज पीछे से फटी हुयी थी. वह ज़ुलेखा का त्रिया-चरित्र समझ गया लेकिन उसके अपनी इज़्ज़त का भी सवाल था. इसीलिए उस ने युसूफ (अलैहिस्सलाम) को ही जेल की सज़ा सुनायी .

इधर ये बात सारे मिस्र की औरतो में फ़ैल गयी की अज़ीज़ मिस्र की बीवी एक गुलाम के इश्क़ में गिरफ्तार हो गयी. इस तरह की बाते तोह औरतो में ख़ास टूर पे ऊँची सोसाइटी (तबके) से ताल्लुक रखने वाली औरतो में खूब फैलती है. फिर इसमें मिर्च-मसाला भी शामिल हो जाता है. उन्होंने ज़ुलेखा को ताने देना शुरू किया. इस को अगर इश्क़ करना था तो इस के लिए इसे अपना गुलाम ही मिला!. और अगर गुलाम पर दिल आ भी गया तोह उसको अपनी तरफ माएल भी न कर सकी!.

ज़माल-ऐ-युसूफ (अलैहिस्सलाम) को देखकर औरतो ने अपने हाथ काटे :
ज़ुलेखा ने जब मिस्र की औरतो के ये ताने सुने तोह उन् लोगो का मुह्ह बंद करने के लिए उसने एक तरकीब सोची.
उस ने तमाम मिश्र की औरतो के लिए एक दावत की महफ़िल का इंतज़ाम किया और सब के सामने फल ( फ्रुइट) और चाक़ू (नाइफ) रख दिया. और उन् औरतो से कहा जब युसूफ (अलैहिस्सलाम) सामने से गुज़रे तोह तुम ये फल काट लेना. और युसूफ (अलैहिस्सलाम) को उनके सामने से गुजरने का हुक्म दिया.

युसूफ (अलैहिस्सलाम) जैसे ही उनके सामने से नीची निगाह किये गुज़रे. वैसे ही ज़ुलेखा ने उन औरतो को फल काटने के लिए कहा. उन् औरतो ने ज़माल-ऐ-युसूफ (अलैहिस्सलाम) देखा तोह अपने होश खो बैठी और फल की जगह अपने अपने हाथ काट बैठी और बड़े हैरत से कहा , “ये इंसान नहीं हो सकता ये तो कोई फरिश्ता है”

रिफरेन्स: (वर्चुअल स्टडी ऑफ़ मुहम्मद रफ़ीक, क़सस-उल-अम्बिया)

आगे का क़िस्से हिकायत (पोस्ट-8) में …

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