हज़रत युसूफ (अलैहिस्सलाम) को माईल करने में ज़ुलेखा नाकाम और युसूफ (अलैहिस्सलाम) की बेगुनाही साबित

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Hazrat Yusuf (Alaihissalam) Ko Maayeel Karne Me Zulekha Naakam Aur Yusuf (Alaihissalam) Ki Begunahi Sabit
Hazrat Yusuf (Alaihissalam)
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Hazrat Yusuf (Alaihissalam) Ko Maayeel Karne Me Zulekha Naakam Aur Yusuf (Alaihissalam) Ki Begunahi Sabit

हिकायत: युसूफ (अलैहिस्सलाम)

हज़रत युसूफ (अलैहिस्सलाम) को माईल करने में ज़ुलेखा नाकाम और युसूफ (अलैहिस्सलाम) की बेगुनाही साबित

अज़ीज़ दोस्तों ,… अल्लाह तआला क़ुरान-ऐ-करीम में फरमाता है, “उस औरत ने युसूफ (अलैहिस्सलाम) को अपनी तरफ माईल करना चाहा, वह भी उसकी तरफ माईल हो जाते अगर अपने रब की बुरहान (निशानिया) न देख लेते. और इस तरह हम ने इन्हे बुराई और बेहायाइ से बचा लिया क्योंकि वो हमारे मुख़लिश बन्दों में से थे..”

सहाबी-ऐ-रसूल अब्दुल्लाह बिन उम्र कहते है की आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया,
“हज़रत युसूफ (अलैहिस्सलाम) इज़्ज़तदार, इज़्ज़तदार के बेटे, इज़्ज़तदार के पोते, और इज़्ज़तदार के पर-पोते थे. वह इश्क़ (अलैहिस्सलाम) के पोते और इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) के पर-पोते थे. जो सब के सब अम्बिया (अलैहिस्सलाम) थे,..”

युसूफ (अलैहिस्सलाम) का हुस्न देख कर वह औरते जिन्हे ज़ुलेखा ने दावत दी थी, काबू में न रह सकी, और फलो के बजाये अपने हाथ काट लिए. एक रिवायत में है की वह फल (निम्बू) लेमन था. और उन औरतो ने अपनी उंगलिया काट ली थी.

हज़रत अनस बिन मालिक कहते है की आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ) ने फ़रमाया,
“मई जब मेराज़ पर गया और तीसरे आसमान पर पहुँचा तोह वहा युसूफ (अलैहिस्सलाम) से मुलाक़ात हुयी, अल्लाह तआला ने हुस्न का आधा हिस्सा उन्हें अत किया था,..”

जब उन् औरतो ने देखा की ये नौजवान आँख उठा कर इस हुस्न की महफ़िल को देखता ही नहीं, तो वह बे-अख्तियार ही पुकार उठी के ये इंसान नहीं बल्कि कोई मोआज फरिश्ता है.

ज़ुलेखा कहने लगी, “ये है जिस के बारे में तुम ने मुझे मलामत किया था बेशक मैंने इसे अपनी तरफ रिझाने की कोशिश की थी मगर वह बच निकला , अगर अब भी उसने मेरा कहना न माना तोह क़ैद कर दिया जाएगा और ज़लील हो जायेगा”.

अज़ीज़ दोस्तों पहले तोह सिर्फ ज़ुलेखा ही हज़रत युसूफ (अलैहिस्सलाम) पर आशिक़ थी और उन्हें वरगालाना (बहकाना) चाहती थी लेकिन अब तोह मिश्र की साडी बड़ी और रसूखदार औरते हज़रत युसूफ (अलैहिस्सलाम) की आशिक़ हो गयी और सब उन्हें अपनी तरफ माएल (झुकाने) की कोशिश करने लगी तोह युसूफ (अलैहिस्सलाम) ने अल्लाह तआला से दुआ की, “ऐ मेरे रब, ये जिस चीज़ की तरफ मुझे बुला रही है उस से तो मुझे क़ैद ही जियादा पसंद है , और Agar तूने इनके मक्कार (चाल बाज़िया) को मुझ से दूर न रखा तो मई इनकी तरफ झुक जावूँगा और जाहिलो में से हो जावूँगा”.
अल्लाह तआला ने उनकी दवा क़बूल की और उन् औरतो के मक्कार से उन्हें दूर (महफूज़) रखा.

युसूफ (अलैहिस्सलाम) के क़ैद में 7-9 साल:

अब युसूफ (अलैहिस्सलाम) को क़ैदख़ाने में दाल दिया गया उस क़ैद खाने में 2 क़ैदी और भी थे उन् में से एक बादशाह का नानबाई (बावरची), जब की दूसरा बादशाह को शराब पिलाने वाला था वह दोनों उन् के पास आये और कहा हमें तो तुम भले और नेक आदमी लगते हो हम दोनों ने एक एक खवाब देखा है. एक ने कहा मैंने देखा की मे शराब निचोड़ रहा हूँ. दूसरे ने कहा, “मैंने देखा की मे सर पर रोटियां उठाये हुवा हूँ और परिंदे उसे नोच नोच कर खा रहे है”. आप इन् खवाबो की हमें ताबीर बताये.

युसूफ (अलैहिस्सलाम) ने कहा, “जो खाना तुम्हे यहाँ मिला करता है उस के आने के पहले मे तुम्हे तुम्हारे खवाबो की ताबीर बतला दुगा , ये इल्म मुझे मेरे रब ने सिखाया है , और मैंने उन् लोगो का दीं छोड़ दिया है जो अल्लाह तआला पर ईमान नहीं लाते और आख़िरत के भी मुनकिर है, और मैंने अपने अब्बा इब्राहिम, इशाक और याक़ूब (अलैहिस्सलाम) का दीं इख्तियार किया है” .

फिर उनसे कहा मेरे साथी क़ैदियों तुम में से एक तोह अपने मालिक को शराब पिलायेगा वो रिहा (आज़ाद) हो जायेगा, और दूसरे को सूली पे चढ़ा दिया जायेगा और परिंदे उस के सर का गोश्त नोच नोच कर खायेगे . जिस के बारे में युसूफ (अलैहिस्सलाम) को यक़ीन था की वह रिहा हो जायेगा आप ने उस से कहा की जब तुम आज़ाद हो जाओ और बादशाह (मालिक) के पास जाओ तोह मेरे बारे में बाते करना. उस शख्श ने वादा तोह किया लेकिन जब रिहा हो कर बाहर गया तो भूल गया. इस तरह 7-9 साल युसूफ (अलैहिस्सलाम) को क़ैद में बिताने पड़े.

युसूफ (अलैहिस्सलाम) से ख्वाब की ताबीर:
एक दिन बादशाह ने एक खवाब देखा की 7 मोती गाये (काऊ) है जिन्हे 7 दुबली गाये (काऊ) खा रही है और अनाज की 7 बालिया हरी (ग्रीन) है और दूसरी 7 बलिया सुखी हुयी है बादशाह ये खवाब देख कर बहुत परेशान हुवा और अपने दरबारियों से इस खवाब की ताबीर बताने के लिए कहा

अज़ीज़ दोस्तों ,.. जब मिश्र के बादशाह ने वह खवाब देखा तोह बहुत बेचैन हुवा. उसने अपनी हुकूमत के सभी दानिशवर और खवाबो की ताबीर बताने वालो को अपने दरबार में बुलाया और अपना खवाब सुना कर उनसे अपने खवाबो की ताबीर पूछी. कोई उसे तसल्ली बख्श जवाब न दे पाया किसी ने कहा हम नहीं जानते तो किसी ने कहा ये परेशान खयालात है उसी दरबार में वह शख्श भी था जिसे युसूफ (अलैहिस्सलाम) ने उसके खवाबो की ताबीर बतलाई थी, और वह आज़ाद हो गया था. उसे युसूफ (अलैहिस्सलाम) की याद उस वक़्त आयी.

उसने बादशाह से कहा की मे आप के खवाबो की ताबीर बतला सकता हूँ , मुझे क़ैद खाने भेजा जाए बादशाह ने उसे क़ैदख़ाने जाने की इजाज़त देदी जब वह युसूफ (अलैहिस्सलाम) के पास पहुँचा तोह उनसे कहा
“ऐ मेरे सच्चे दोस्त मुझे मुआफ कर देना मे अपना वादा भूल गया था लेकिन अभी मे आप के पास एक खवाब की ताबीर जानने आया हूँ”.

उसने कहा , “बादशाह ने खवाब देखा है 7 मोती गाये (Cow) को 7 दुबली गाये (Cow) खा रही है और 7 हरी (Green) बलिया है और 7 सुखी बलिया है ”. आप मुझे इस की ताबीर बता दे ताकि मे वापस जा कर उन् लोगो को बता सकू”.

युसूफ (अलैहिस्सलाम) ने कहा , “तुम 7 साल लगातार खेती बाड़ी करोगे जो खेती तुम काटो इस में खाने के लिए थोड़ा बहुत अनाज छोड़ कर बाक़ी अनाज बालियों में ही लगा रहने देना . फिर इसके बाद 7 साल सख्त सूखा पड़ेगा और जो अनाज तुम ने इन सालो के लिए पहले से बचा कर रखा होगा वो सब खा लिया जायेगा. थोड़े से अनाज के सिवा जो तुम लोग बचा कर रखोगे इस के बाद के साल में खूब खेती बाड़ी होगी और सब चीज़ो की पैदावार बहुत होगी यहाँ तक के तुम लोग उस साल फल (Fruite) निचोड़ोगे.

बादशाह ने जब अपने खवाब की ये ताबीर सुनी तोह बहुत मुतास्सिर हुवा और कहा की, “युसूफ को मेरे पास लाओ”. मगर जब क़सीद (खबर देनेवाला) युसूफ (अलैहिस्सलाम) के पास पहुँचा तोह उन्होंने कहा, “अपने बादशाह के पास वापस जाओ और पूछो के उन औरतो वाला मामला क्या है , जिन्होंने अपने हाथ काट डाले थे . मेरा रब तोह उनके चरित्रों को जान्ने वाला है”.

युसूफ (अलैहिस्सलाम) की बेगुनाही साबित हुई:
युसूफ (अलैहिस्सलाम ) ने जो जवाब दिया इस से उनके बे-पनाह सब्र और वक़ार का अंदाजा होता है. आपने अपनी बेगुनाही साबित होने से पहले, अपनी आज़ादी को क़बूल करने से इंकार कर दिया. बादशाह ने उन साड़ी औरतो को बुलाया और पूछा, “क्या मामला था. जब तुम ने युसूफ (अलैहिस्सलाम) को वरगालाना चाहा था?”. वो सब बोल उठी, “माशा अल्लाह हम ने उनमे कोई बुराई नहीं देखी” उसी वक़्त ज़ुलेखा भी बोल उठी, “अब तोह हक़ बात ज़ाहिर हो चुकी है, मैंने ही उसे वर्गलाया था, और वह सच्चा है”.

युसूफ (अलैहिस्सलाम) ने कहा, “मे तोह बस इतना चाहता था के अज़ीज़ मिश्र ये जान ले के मैंने उसकी पीठ के पीछे उसकी खयानत नहीं की, और अल्लाह तआला कभी खयानत करने वालो को राह नहीं दिखाता”. इस तरह भरी महफ़िल में युसूफ (अलैहिस्सलाम) की बेगुनाही साबित हो गयी और असल मुज़रिम ने अपना गुनाह क़बूल किया” .

युसूफ (अलैहिस्सलाम) को बादशाह ने खाज़िन्दर का ओहदा (मर्तबा) अत किया:
अब बादशाह ने युसूफ (अलैहिस्सलाम) से कहा, “आपने जो इन खवाबो की ताबीर बतायी है, तोह उससे निपटने की तरकीब क्या होगी. युसूफ (अलैहिस्सलाम) ने कहा, “मुझे ज़मीन के ख़ज़ाने पर मुक़र्रर कर दीजिये , मैं इनकी हिफाज़त करने वाला हूँ और ये काम भी जनता हूँ”. तब बादशाह ने उन्हें वज़ारत मालियात या वज़ारत खुराक (एग्रीकल्चर मिनिस्टरी) के मनसब (ओहदे) पर फ़ाएज़ किया.

रिफरेन्स: (वर्चुअल स्टडी ऑफ़ मुहम्मद रफ़ीक, क़सस-उल-अम्बिया)

आगे का किस्सा हिकायत (पोस्ट-9) में …

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