सूरह नाज़िआत का तर्जुमा

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Surah Naziaat Ka Tarjuma
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Surah Naziaat Ka Tarjuma

सूरह नाज़िआत का तर्जुमा

क़ुरान का तर्जुमा

पोस्ट न०-10

(सूरह नाज़िआत) पारा न०-30

इस सूरह में 46 आयत है,

27 से 36 आयत इस पोस्ट में हैं.

शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो बड़े मेहरबान,निहायत रेहम वाले हैं

27 भला तुम्हारा दूसरी बार पैदा करना अपने आप में ज्यादह सख्त है या आसमान का? अल्लाह तआला ने उसको बनाया,

28 इस तरह से की उसके छत को बुलंद किया और उसको दुरुस्त बनाया की कहीं उसमे नुक्स और दरार नहीं ,

29 और उसकी रात को अँधेरी बनाया और उसके दिन को ज़ाहिर बनाया,

30 और उसके बाद ज़मीन को बिछाया,

31 और बिछाकर उससे उसका पानी और चारा निकाला,

32 और पहाड़ों को उसपर क़ायम कर दिया,

33 तुम्हारे और तुम्हारे मवेशिओं को फ़ायदाः पहुँचाने के लिए,

34 सो जब वो बड़ा हंगामा आएगा,

35 यानी जिस दिन इंसान अपने किये को याद करेगा,

36 और देखने वालों के सामने दोज़ख ज़ाहिर की जाएगी,

तफ़्सीर इब्ने कसीर जिल्द 6,सफ़ा 573 & 574. (सिर्फ तर्जुमा लिखा जा रहा)

नोट

मवेशिओं = जानवर,, बड़ा हंगामा=क़यामत का दिन,, क़याम कर दिया=खड़ा कर दिया,, दोज़ख=जहनुम.

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