सूरह नाज़िआत का तर्जुमा

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Surah Naziaat Ka Tarjuma
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Surah Naziaat Ka Tarjuma

सूरह नाज़िआत का तर्जुमा

क़ुरान का तर्जुमा

पोस्ट न०-07

❨सूरह नाज़िआत) पारा न०-30

इस सूरह में 46 आयत है, और ये सूरह मक्का में नाज़िल हुई है.

1 से 6 आयत इस पोस्ट में हैं.

शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो बड़े मेहरबान, निहायत रेहम वाले हैं.

1 क़सम है उन फरिश्तों की जो {काफिरों की} जान सख्ती से निकलते हैं,

2 और जो {मुसलमानो की रूह आसानी से निकलते हैं गोया उनका} बंद खोल देते हैं,

3 और जो तैरते हुए चलते हैं, फिर तेज़ी के साथ दौड़ते हैं,

4 फिर हर मामले की तदबीर करते हैं,

5 {उन सबकी कस्मे खा कर कहते हैं के क़यामत जरूर आएगी} जिस दिन हिला देने वाली चीज़ हिला डालेगी {इससे सुर का पहली बार फूंका जाना मुराद हैं},

6 जिसके बाद एक पीछे आने वाली चीज़ आएगी {इससे सुर का दूसरी बार फूंका जाना मुराद हैं.}

तफ़्सीर इब्ने कसीर जिल्द 6,सफा 568. {सिर्फ तर्जुमा लिखा जा रहा}

नोट

बंद खोलना=जैसे कोई आसानी से गांठ खोल देते है.


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