सूरह अल-इंशिकाक का तर्जुमा

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Surah Al-Inshiqaq Ka Tarjuma
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Surah Al-Inshiqaq Ka Tarjuma

सूरह अल-इंशिकाक का तर्जुमा

क़ुरान का तर्जुमा पोस्ट न०-29

❨सूरह अल-इंशिकाक❩ पारा न०-30

इस सूरह में 25 आयत है, और ये सूरह मक्का में नाज़िल हुई है.

1 से 6 आयत इस पोस्ट में हैं

शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो बड़े मेहरबान,निहायत रेहम वाले हैं.

1- जब (दूसरी बार सूर फूंकने के वक़्त) आसमान फट जायेगा, (ताकि उसमे से बादल और फ़रिश्ते नाज़िल हो),

2- और अपने रब का हुक्म सुंन लेगा और वो (आसमान) इसी लायक है,

3- और जब ज़मीन खींच कर बढ़ा दी जाएगी,

4- और (वो ज़मीन) अपने अंदर की चीज़ो (यानि मुर्दो) को बहार उगल देगी और खली हो जाएगी,

5- और अपने रब का हुक्म सुंन लेगी, और वो इसी लायक है,

6- ऐ इंसान! तो अपने रब के पास पहुंचने तक (यानि मरने के वक़्त तक) काम में कोशिश कर रहा है, फिर (क़यामत में) उस (काम की जज़ा) से जा मिलेगा

(तफ़्सीर इब्ने कसीर जिल्द 6,सफ़ा-604. (सिर्फ तर्जुमा लिखा जा रहा)

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