मुसीबत या परेशानी के वक़्त पढ़ने की दुआ

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museebat ya pareshani ke waqt padhne ki dua
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museebat ya pareshani ke waqt padhne ki dua

मुसीबत या परेशानी के वक़्त पढ़ने की दुआ


रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया-

की क्या मैं तुम्हे ऐसे कलिमात न सिखाऊ जिनको

तुम मुसीबत ( या परेशानी) के वक़्त पढ़ा करो (वो कलिमात ये हैं)

اللَّهُ اللَّهُ رَبِّي لَا أُشْرِكُ بِهِ شَيْئَاً

अल्लाहू, अल्लाहू रब्बी ला उशरिका बेही शयआ

(अल्लाह , अल्लाह मेरा रब्ब है और मैं उसके साथ किसी को शरीक नही करता)

(सुनन अबू दाऊद, जिल्द 1, 1512-सही)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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आमीन

►जज़ाकअल्लाह खैरन◄

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