क्या में अपने मिलने वालों को सफर के हालत सुना सकता हूँ

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Kyaa Me Apne Milne Walon ko Safar Ke Haalat Suna Sakta Hun
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Kyaa Me Apne Milne Walon ko Safar Ke Haalat Suna Sakta Hun

क्या में अपने मिलने वालों को सफर के हालत सुना सकता हूँ

सवालात-ऐ-हज पोस्ट न०-31


क्या में मेरे मिलने वालों से ये कह सकता हूँ के में हज कर के आया और सफर के हालत सुना सकता हूँ…?

हज का तज़किराह हर एक शख्स से ना करना चाहिये,

क्यों के तज़किराह में खौफ है रिया और फख्र (बड़ाई) पैदा होने का,

रिया और फख्र की निय्यत से तज़किराह करना तो बुरा है ही,

लेकिन मुहक़्क़ेक़ीन सूफ़िया तो बाज़ अवक़ात ऐसे तज़किरों को भी मना करते है

जो बज़ाहिर ताअत मालूम होते है,

मसलन वहाँ के महासिन (अच्छे मंज़र) और फ़ज़ाइल बयां करना जिससे वहाँ जाने का शौक़ और रगबत पैदा हो.


तज़किराह सुनने वाले 3 क़िस्म के लोग है.

1. एक वो लोग है जिन पर हज फ़र्ज़ है,

उनके सामने तो तरग़ीबी मज़ामीन बयान करना जैज़ है बल्कि मुस्तहब है,

2. दूसरे वो लोग जिन पर हज फ़र्ज़ नहीं है,

लेकिन उनमे हज की ताक़त और गुंजाइश है,

और उनको हज करने जाना मना भी नहीं है,

उनके सामने भी बयान करना जाइज़ है,

3. तीसरे वो लोग जिन पर हज फ़र्ज़ नहीं है,

उनको हज के लिए जाना मना है

ये वो लोग है जिनकी माली ताक़त नहीं है,

और मशक़्क़त पर सब्र और बरदाश्त की भी क़ुदरत नहीं है,

ऐसे लोगों के सामने ऐसे वाक़ियात और मज़ामीन बयान करना जिनसे उनको हज का शौक़ पैदा हो जाइज़ नहीं,

क्यों के इससे उनको हज का शौक़ पैदा होगा और उनके पास सामान है ही नहीं,

ना ज़ाहिरी, ना बातिनी, तो खमाखा परेशानी में मुब्तला होंगे,

जिसे नाजाइज़ कामो में पद जाने का खतरा है.

जैसे बिला ज़रुरत क़र्ज़ लेना, हज उमराह में जाने के लिए सवाल करना,

ज्यादा और जल्द कमाने की फ़िक्र में हराम हलाल की तमीज़ ख़त्म हो जाना,

कम पैसे में हज,उमराह करने के चक्कर में धोका खाना वगैरह में पद जाने का अंदेशा है.

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