इब्राहिम अलैहिस्सलाम का बीबी हाजरा और बेटे इस्माईल अलैहिस्सलाम को सुमसान वादी में तनहा छोड़ जाना

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Ibrahim Alaihissalam Ka Bibi Hajra Aur Bete Ismaayeel Alaihissalam Ko Sumsaan Waadi Me Tanha Chorh Jaana
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Ibrahim Alaihissalam Ka Bibi Hajra Aur Bete Ismaayeel Alaihissalam Ko Sumsaan Waadi Me Tanha Chorh Jaana

इब्राहिम अलैहिस्सलाम का बीबी हाजरा और बेटे इस्माईल अलैहिस्सलाम को सुमसान वादी में तनहा छोड़ जाना

हिकायत: इब्राहिम (अलैहिस्सलाम)


इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) का बीबी हाजरा और बेटे इस्माईल (अलैहिस्सलाम) को सुमसान वादी में तनहा छोड़ जाना.

अज़ीज़ दोस्तों,….. इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) और लूत (अलैहिस्सलाम) सीरिया (शाम) की तरफ चले गए. उसके बाद लूत

(अलैहिस्सलाम) एक क़ौम सादूम की तरफ भेजे गए. और अल्लाह तआला ने दो (2) फ़रिश्तो को भेजा जिन्होंने इब्राहिम

(अलैहिस्सलाम) को औलाद की खुश खबरि दी, और क़ौम लूत (अलैहिस्सलाम) को अज़ाब दिया. आप लोग यहाँ तक

हिकायत (Post 10) में पढ़ चुके है. अब आगे…

इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) की दो (2) बीविया थी जिनमे से पेहली बीवी हज़रत बीबी सायरा थी और दूसरी बीवी हज़रत

बीबी हाजरा. बीबी हाजरा, इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) की गुलाम (बंदी) थी. लेकिन इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) ने उनसे

निकाह किया था. जैसा की फ़रिश्तो ने इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) को औलाद की खुश खबरि दी थी, तो बीबी सायरा से

इस्हाक़ (अलैहिस्सलाम) पैदा हुवे और बीबी हाजरा से इस्माईल (अलैहिस्सलाम) पैदा हुवे. अब क्योंकि बीबी सायरा पहेली

बीवी थी, इसीलिए उन्होंने इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) पर दबाव डाला की, आप बीबी हाजरा को छोड़ दे. और ये ही

अल्लाह सुब्हानहु तआला की रज़ा थी.


इसीलिए इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) ने बीबी हाजरा और इस्माईल (अलैहिस्सलाम) को साथ में लिया, उस वक़्त इस्माईल

(अलैहिस्सलाम) शीर खवार (दूध पीते) बच्चे थे. उन माँ-बेटो को एक सुमसान वादी में ले गए, जहा आज मक्का शरीफ

आबाद है, उस वक़्त वो एक बियाबान सहेरा था, न कोई आदम और ना कोई आदम की ज़ात. वहा पहुँच कर इब्राहिम

(अलैहिस्सलाम) ने उन्हें एक खजूर के दरख़्त (ट्री) के निचे बिठाया और कुछ खाने का सामान और एक मस्कीजा पानी

का दिया. मस्कीजा जानवरो के चमड़े से बानी हुयी एक थैली (बैग) होता है. और वहा से अकेले जाने लगे

बीबी हाजरा उनके पीछे दौड़ी की, “हमें इस सुमसान वादी में छोड़ कर क्यों जा रहे हो?” . इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) ने

कोई जवाब ना दिया. बीबी हाजरा ने फिर पुछा, “क्या ये अल्लाह तआला का हुक्म है?” इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) ने सर

हिलाकर ख़ामोशी में इशारे में जवाब दिया, “हाँ!”

और फिर वो जिस रास्ते से आये थे उसी रास्ते से वापस चले गए और जाते जाते अपने क़दमों के निशाँ भी मिटाते चले गए.

उन्हें ये अंदेशा था कही उनके क़दमों के निशाँ का पीछा करते करते बीबी सायरा, बीबी हाजरा तक ना पहुँच जाए.


माँ की औलाद के लिए बेकरारी:

अब बीबी हाजरा और इस्माईल (अलैहिस्सलाम) उस तपते हुवे रेत (सैंड) के सेहरा में तनहा रह गए. बीबी हाजरा के पास

जो खाना और पानी था वो सब ख़तम हो गया. पानी ना मिलने की वजह से उनकी छाती का दूध भी सूख गया. और जब

बच्चे के लिए भी दूध ना उतरा छाती से तो बच्चा भी भूक की वजह से रोने लगा. तो बीबी हाजरा ने बच्चे को खजूर के

झाड़ की चावो में लीता दिया और सामने दो (2) पहाड़िया थी जिसे आज सफा मारवाह के नाम से जाना जाता है.

उस पहाड़ी पर चढ़ गयी की देखे शायद कोई काफिला या कोई इंसान दिख जाए तो कम से कम उस से पानी तो मांग ले

की जिस्म में पानी जाए तो बच्चे के लिए दूध बने और बच्चे की भूक मिठे. जब वो एक पहाड़ी पर चढ़ती तो बच्चा आँखों से

ओझल हो जाता, बच्चे की मोहब्बत में वो जल्दी से निचे उतर आती. लेकिन बच्चे को रोटा देख जल्दी से भाग कर दूसरी

पहाड़ी पर चढ़ जाती, की शायद कोई नज़र आ जाए और कुछ मदद मिल जाये. इस तरह आप ने उन दोनों पहाड़ी के

सात (7) चक्कर लगाए. कभी पहाड़ी चढ़ती और कभी औलाद की मोहब्बत में निचे उतर आती. अल्लाह तआला को

बीबी हाजरा की ये अपनी औलाद के लिए मुशक़्क़त (मेहनत) इतनी पसंद आयी की, अल्लाह तआला ने हर मुसलमान मर्द

और औरत पर जो भी मक्का शरीफ में हज या उमराह के लिए आता है उनके लिए सफा मारवाह की इन दोनों पहाड़ियों

के सात (7) चक्कर लगाना फ़र्ज़ कर दिया है, और ये भी हज और उमराह के अरकानों में शामिल है …


आब-ए-ज़म-ज़म का चश्मा:

जब बीबी हाजरा उन दोनों पहाड़ियों पर दौड़ कर चढ़ती और औलाद की मोहब्बत और बेकरारी में निचे उतर आती. इधर

बच्चा भूक से रो रहा था और अपनी एड़िया ज़मीन पर रगड़ रहा था. उसी वक़्त रहमत-ऐ-अल्लाह वन्दी जोश में आई और

इस्माईल (अलैहिस्सलाम) जहा अपनी एड़िया रगड़ रहे थे उस जगह से पानी का चस्मा फुट पड़ा. जब बीबी हाजरा ने पानी

देखा तो दौड़ कर अपने बच्चे के पास पहुँची और उस पानी को जो बहे रहा था रोकने के लिए उसके चारो तरफ रेत की

दीवार (मेध) बना दी और कहती जाती थी ज़म-ज़म (यानी की रुक जा या ठहर जा) इसी लिए उस पानी का नाम “आब-

ए-ज़म-ज़म” पढ़ गया.

यह अल्लाह तआला की रहमत थी जो उसने अपने बन्दों पर की. अब बीबी हाजरा ने पानी पिया और अपनी प्यास बुझाई.

और अपने बच्चे को भी दूध पिलाया. दोस्तों आप लोग समझ ही सकते हो की एक बियाबान सुनसान रेगिस्तान में पानी की

क्या कीमत होती है. अब जैसे जैसे लोगो को वहा पानी मिलने की खबर हुई लोग उस जगह पर आने लगे और बीबी

हाजरा की इजाज़त (परमिशन) लेकर उस पानी के चश्मे के आस पास रहने लगे, और इस तरह वहा बस्ती आबाद होने

लगी. और जो तिजारती काफिले एक मुल्क़ से दूसरे मुल्क़ जाते थे वो भी वहा रुकने लगे. इस तरह वो बस्ती तिजारत का

मरकज़ (बिज़नेस सेन्टर) बन गयी.


बेटे की क़ुरबानी का खुआब:

इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) वक़्त-वक़्त पर अपने बीवी और बच्चे से मिलने आते थे. जब इस्माईल (अलैहिस्सलाम) कुछ

समझदार हुवे तो इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) ने एक खुआब देखा की जैसे कोई उनसे कह रहा हो अपनी सबसे कीमती और

महबूब चीज़ की क़ुर्बानी करो. ये ही खुआब उन्हें तीन बार दिखाई दिया. पैगम्बरो के खुआब हम आम इंसानो की तरह

नहीं होते और वो एक हक़ीक़त होते है. इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) समझ गए की अल्लाह सुब्हानहु तआला उन्हें अपनी

महबूब, जान से प्यारी चीज़ की क़ुरबानी के लिए केह रहे है.

इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) अपने बेटे इस्माईल (अलैहिस्सलाम) को बहुत ज़ियादा चाहते थे, वो ही उन्हें सबसे ज़ियादा

महबूब थे. इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) ने इस्माईल (अलैहिस्सलाम) से कहा, “ऐ मेरे बेटे मैंने खुआब देखा है की मैं अपनी

सब से महबूब चीज़ की क़ुरबानी कर रहा हूँ, तुम्हारा इस बारे में क्या ख़याल है?” इस्माईल (अलैहिस्सलाम) ने कहा,

“अगर ये अल्लाह तआला का हुक्म है तो आप कर गुज़रये, इंशाअल्लाह आप मुझे सब्र करने वालो में पाएंगे.


शैतान को सात (7) कंकड़ियां मरने की सुन्नत:

अब इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) इस्माईल (अलैहिस्सलाम) को लेकर उस बस्ती से दूर मीना की वादी में लेगए. वहा शैतान

इंसान के भेस में आया और इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) को इस अमल से रोकने की कोशिश की और कहा, “तुमने तो बस

एक खुआब ही देखा है, क्या तुम उसकी वजह से अपने औलाद की क़ुरबानी दे दोगे!”. इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) समझ

गए की ये शैतान है जो उन्हें उनके इस अमल से रोकना चाहता है. इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) ने सात (7) कंकड़ियां (छोटे

पथ्थर) उठायी और शैतान को मारी. तो शैतान गायब हो गया. फिर दोनों बाप-बेटे कुछ दूर चले तो शैतान फिर हाज़िर

हुवा और कहा, “तुमसे अपनी कोई महबूब चीज़ की क़ुरबानी के लिए कहा गया है

तो अपनी औलाद को छोड़कर किसी और चीज़ की क़ुरबानी करदो!


इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) फिर सात (7) कांकरिया (छोटे पथ्थर) उठायी और शैतान को मारी वो फिर गायब हो गया. अब

फिर दोनों बाप-बेटे कुछ और आगे बढे तो शैतान फिर हाज़िर हुवा और इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) को फिर रोकने की

कोशिश की, इस बार भी इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) ने सात (7) कंकड़ियां उठाकर

शैतान को मारी तो शैतान फिर गायब हो गया.

इस तरह शैतान ने इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) को तीन बार रोका और तीनो ही बार इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) ने उसे सात-

सात कंकड़ियां मारी. अल्लाह तआला को इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) की ये सुन्नत (तरीका) इतना पसंद आया की, अल्लाह

तआला ने हर मुसलमान मर्द और औरत पर ये फ़र्ज़ कर दिया की जो भी लोग हज करे, वो लोग इब्राहिम (अलैहिस्सलाम)

की इस सुन्नत को ज़रूर अदा करे.

और ये भी हज के अरकानो में से एक अरकान है. और जिस जिस जगह पर शैतान हाज़िर हुवा था उस जगह पर आज भी

सीमेंट का पिलर (खम्बा) (या ज़मरूक) मौजूद है, और जो भी हाजी हज करने जाते है, वो वहा पर उस शैतान को सात-

सात कंकड़ियां ज़रूर मारते है. क्योंकि इस अमल के बिना क़ुरबानी नहीं होती और हज भी क़बूल नहीं होता…

रिफरेन्स: (वर्चुअल स्टडी ऑफ़ मुहम्मद रफ़ीक, क़सस-उल-अम्बिया)

आएगी का किस्सा अगली पोस्ट (14) में

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